• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • Mutual Funds मास्टरी
  • होम
  • धर्म
  • कहते हैं

मैहर के दूल्हा देव को नवरात्र में भी चढ़ाई जाती है मदिरा, मां शारदा के दर्शन के बाद यहां आते हैं श्रद्धालु

कई भक्तों का विश्वास है कि मां शारदा के दर्शन के बाद दूल्हा देव के दरबार में हाजिरी लगाने से उनकी यात्रा पूरी होती है। हालांकि, इस परंपरा की शुरुआत कब...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Wed, 14 Oct 2026 01:54:19 PM (IST)Updated Date: Wed, 14 Oct 2026 02:03:20 PM (IST)
मैहर के दूल्हा देव को नवरात्र में भी चढ़ाई जाती है मदिरा, मां शारदा के दर्शन के बाद यहां आते हैं श्रद्धालु
मैहर के दूल्‍हा देव।

HighLights

  1. दूल्हा देव को बाबा साहब, शारदा बाबा और वाल बाबा कहते हैं।
  2. मंदिर में स्थापित शिला और चरण पादुका की पूजा की जाती है।
  3. देश के कई हिस्सों से भक्त दर्शन, पूजा-अर्चना के लिए पहुंच रहे हैं।

नईदुनिया प्रतिनिधि, मैहर। शारदीय नवरात्र के दौरान मां शारदा के दर्शन के लिए मैहर में लाखों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। त्रिकूट पर्वत पर विराजमान मां शारदा के दर्शन के बाद बड़ी संख्या में भक्त पहाड़ी के नीचे स्थित दूल्हा देव के मंदिर में भी मत्था टेकने पहुंचते हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, दूल्हा देव के दरबार में शराब का भोग लगाने की परंपरा है। यह परंपरा उन्हें उज्जैन के काल भैरव की तरह विशिष्ट पहचान दिलाती है। श्रद्धालु यहां नारियल, मिठाई और शराब सहित विभिन्न प्रसाद चढ़ाकर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना करते हैं।

तपस्या करते-करते समाधि में लीन होने की मान्यता

दूल्हा देव को लेकर स्थानीय क्षेत्र में प्रचलित मान्यता है कि उन्होंने मां शारदा की तपस्या करते-करते समाधि ले ली थी। तभी से श्रद्धालु उनकी पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं। कई भक्तों का विश्वास है कि मां शारदा के दर्शन के बाद दूल्हा देव के दरबार में हाजिरी लगाने से उनकी यात्रा पूरी होती है। हालांकि, इस परंपरा की शुरुआत कब और किसने की, इसकी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है।


बाबा साहब और शारदा बाबा के नाम से भी पहचान

मंदिर में पूजा-अर्चना कराने वाले छोटेलाल पंडा ने बताया कि दूल्हा देव को बाबा साहब, शारदा बाबा और वाल बाबा सहित कई नामों से जाना जाता है। मंदिर में स्थापित शिला और चरण पादुका की पूजा की जाती है। उनके अनुसार, पहले मुख्य रूप से इलाहाबाद और बांदा क्षेत्र से श्रद्धालु यहां शराब चढ़ाने आते थे, लेकिन अब देश के अलग-अलग हिस्सों से भक्त दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंच रहे हैं।

नवरात्रि 2026: ग्रहों की समस्याओं को दूर करने के लिए नवरात्रि में क्या करें? ज्योतिषी बताते हैं आसान उपाय

मनोकामना लेकर पहुंचते हैं भक्त

प्रयागराज से आए श्रद्धालु भीम यादव ने बताया कि वह बचपन से ही दूल्हा देव के दरबार में आ रहे हैं। यहां नारियल, मिठाई और शराब सहित विभिन्न प्रसाद चढ़ाते हैं। उनका विश्वास है कि दूल्हा देव भक्तों की रक्षा करते हैं और उनकी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। मां शारदा के दर्शन के लिए उमड़ रही भीड़ के बीच दूल्हा देव के मंदिर में भी श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी हुई है। मां शारदा धाम आने वाले अनेक भक्तों के लिए यह स्थान उनकी धार्मिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव बन गया है।