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दुनिया का इकलौता मंदिर जहां भगवान राम को मिलती है पुलिस की सलामी, जानें क्या है ओरछा के राम राजा मंदिर की अनोखी परंपरा

मध्य प्रदेश के ओरछा में भगवान राम को नगर का वास्तविक शासक माना जाता है। वहां बुंदेलखंडी परंपरा के तहत प्रतिदिन एमपी पुलिस द्वारा उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर द...और पढ़ें

By Akriti KumariEdited By: Akriti Kumari
Publish Date: Sat, 25 Jul 2026 04:38:45 PM (IST)Updated Date: Sat, 25 Jul 2026 04:38:45 PM (IST)
दुनिया का इकलौता मंदिर जहां भगवान राम को मिलती है पुलिस की सलामी, जानें क्या है ओरछा के राम राजा मंदिर की अनोखी परंपरा
मध्य प्रदेश के ओरछा में स्थित राम राजा सरकार मंदिर अपनी अनूठी परंपरा केलिए जाना जाता है। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. ओरछा के राम राजा सरकार मंदिर में भगवान को सलामी दी जाती है
  2. पुलिस भगवान राम को रोज सुबह-शाम गार्ड ऑफ ऑनर देती है
  3. ओरछा की महारानी भगवान राम के बाल रूप को अयोध्या से ओरछा लाई थी

धर्म डेस्क, मध्यप्रदेश। मध्य प्रदेश के ओरछा में स्थित राम राजा सरकार मंदिर अपनी अनूठी परंपराओं के कारण देश-दुनिया में प्रसिद्ध है। यह दुनिया का इकलौता ऐसा मंदिर माना जाता है, जहां भगवान राम की पूजा एक राजा के रूप में की जाती है। यहां उन्हें केवल आराध्य देव नहीं, बल्कि ओरछा का वास्तविक शासक माना जाता है। यही वजह है कि MP पुलिस आज भी उन्हें प्रतिदिन गार्ड ऑफ ऑनर (सशस्त्र सलामी) देती है।

क्यों खास है राम राजा मंदिर?

ओरछा के राम राजा मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां भगवान राम किसी पारंपरिक मंदिर में नहीं, बल्कि राजमहल में विराजमान हैं। मंदिर की पूरी व्यवस्था भी एक राजदरबार की तरह संचालित होती है। सुबह की आरती से लेकर रात के विश्राम तक सभी धार्मिक अनुष्ठान राजसी परंपराओं के अनुसार किए जाते हैं। श्रद्धालु यहां भगवान के दर्शन के साथ-साथ अपने राजा के दरबार में हाजिरी लगाने की भावना से पहुंचते हैं।


भगवान राम को क्यों देती है पुलिस सलामी?

ओरछा में भगवान राम को राजा का दर्जा प्राप्त है। इसलिए मध्य प्रदेश पुलिस की ओर से उन्हें प्रतिदिन सशस्त्र सलामी (गार्ड ऑफ ऑनर) दी जाती है। यह सम्मान उसी तरह दिया जाता है, जैसा किसी संवैधानिक पद पर आसीन विशिष्ट व्यक्ति को दिया जाता है। सदियों पुरानी यह परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा और अनुशासन के साथ निभाई जाती है और इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं।

कैसे हुई राम राजा मंदिर की स्थापना?

मंदिर से जुड़ी लोकमान्यता के अनुसार, ओरछा की महारानी कुंवरि गणेश भगवान राम की अनन्य भक्त थीं। एक बार राजा मधुकर शाह के साथ धार्मिक मतभेद होने के बाद उन्होंने अयोध्या जाकर भगवान राम को ओरछा लाने का संकल्प लिया। कहा जाता है कि महारानी ने सरयू नदी के तट पर कठोर तपस्या की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान राम बाल स्वरूप में प्रकट हुए और उनके साथ ओरछा चलने के लिए तैयार हो गए।

भगवान राम ने रखी थीं दो शर्तें

लोकमान्यता के अनुसार, ओरछा आने से पहले भगवान राम ने महारानी के सामने दो शर्तें रखीं।

पहली, वे ओरछा में राजा के रूप में ही निवास करेंगे, देवता के रूप में नहीं।

दूसरी, ओरछा पहुंचने के बाद उन्हें जहां पहली बार स्थापित किया जाएगा, वे हमेशा वहीं विराजमान रहेंगे और उस स्थान से कभी नहीं हटेंगे।

महारानी ने दोनों शर्तें स्वीकार कर लीं और भगवान राम को अपने साथ ओरछा लेकर आईं। मान्यता है कि जिस स्थान पर उन्हें सबसे पहले विराजमान किया गया, वही आज का राम राजा सरकार मंदिर है।

रामनवमी और अन्य पर्वों पर उमड़ती है भक्तों की भीड़

रामनवमी, दीपावली और अन्य प्रमुख धार्मिक अवसरों पर यहां देशभर से हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर की राजसी परंपराएं और भगवान राम को राजा के रूप में मिलने वाला सम्मान इसे भारत के सबसे अनोखे धार्मिक स्थलों में शामिल करता है।

नोट: दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और लोक परंपराओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल धार्मिक और सांस्कृतिक जानकारी देना है।

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