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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 02, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Parivartini Ekadashi 2025: परिवर्तिनी एकादशी पर इस पाठ से दूर होंगे जीवन के संकट, बरसेगी श्रीहरि की कृपा

Parsva Ekadashi: परिवर्तिनी एकादशी 2025 (Parivartini Ekadashi)भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाएगी। इस दिन श्रीहरि विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Akash Sharma
Publish Date: Tue, 02 Sep 2025 09:44:26 AM (IST)Updated Date: Tue, 02 Sep 2025 11:29:12 AM (IST)
Parivartini Ekadashi 2025: परिवर्तिनी एकादशी पर इस पाठ से दूर होंगे जीवन के संकट, बरसेगी श्रीहरि की कृपा
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की परिवर्तिनी एकादशी, श्रीहरि पूजा से मिलेगा शुभ फल

HighLights

  1. परिवर्तिनी एकादशी 2025 का महत्व
  2. विष्णु-लक्ष्मी पूजन का विशेष विधान
  3. चालीसा पाठ से दूर होंगी परेशानियां

धर्म डेस्क: वैदिक पंचांग के अनुसार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को परिवर्तिनी एकादशी (Parivartini Ekadashi 2025) का पर्व मनाया जाता है। इस व्रत का सनातन धर्म में विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है और सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।

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परिवर्तिनी एकादशी व्रत के लाभ

परिवर्तिनी एकादशी व्रत को करने से पापों का नाश होता है और शुभ फल की प्राप्ति होती है। भक्त पूरे दिन उपवास रखते हैं और श्रीहरि की विधिवत पूजा करते हैं। इस अवसर पर विशेष रूप से विष्णु चालीसा (Vishnu Chalisa) का पाठ करने का महत्व बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि इस चालीसा के पाठ से मानसिक शांति प्राप्त होती है और जीवन की सभी परेशानियां दूर होने लगती हैं।


परिवर्तिनी एकादशी पूजा की मान्यता

मान्यता है कि परिवर्तिनी एकादशी पर व्रत और पूजा करने से भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है और घर-परिवार में सुख, समृद्धि और शांति बनी रहती है। साथ ही भक्त की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

इसलिए, परिवर्तिनी एकादशी 2025 पर श्रीहरि विष्णु और माता लक्ष्मी की श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना, उपवास और विष्णु चालीसा का पाठ करना अत्यंत शुभ माना गया है।

।।विष्णु चालीसा का पाठ।।

''दोहा''

विष्णु सुनिए विनय सेवक की चितलाय ।

कीरत कुछ वर्णन करूं दीजै ज्ञान बताय ॥

नमो विष्णु भगवान खरारी, कष्ट नशावन अखिल बिहारी ।

प्रबल जगत में शक्ति तुम्हारी, त्रिभुवन फैल रही उजियारी ॥

सुन्दर रूप मनोहर सूरत, सरल स्वभाव मोहनी मूरत ।

तन पर पीताम्बर अति सोहत, बैजन्ती माला मन मोहत ॥

शंख चक्र कर गदा विराजे, देखत दैत्य असुर दल भाजे ।

सत्य धर्म मद लोभ न गाजे, काम क्रोध मद लोभ न छाजे ॥

सन्तभक्त सज्जन मनरंजन, दनुज असुर दुष्टन दल गंजन ।

सुख उपजाय कष्ट सब भंजन, दोष मिटाय करत जन सज्जन ॥

पाप काट भव सिन्धु उतारण, कष्ट नाशकर भक्त उबारण ।

करत अनेक रूप प्रभु धारण, केवल आप भक्ति के कारण ॥

धरणि धेनु बन तुमहिं पुकारा, तब तुम रूप राम का धारा ।

भार उतार असुर दल मारा, रावण आदिक को संहारा ॥

आप वाराह रूप बनाया, हिरण्याक्ष को मार गिराया ।

धर मत्स्य तन सिन्धु बनाया, चौदह रतनन को निकलाया ॥

अमिलख असुरन द्वन्द मचाया, रूप मोहनी आप दिखाया ।

देवन को अमृत पान कराया, असुरन को छवि से बहलाया ॥

कूर्म रूप धर सिन्धु मझाया, मन्द्राचल गिरि तुरत उठाया ।

शंकर का तुम फन्द छुड़ाया, भस्मासुर को रूप दिखाया ॥

वेदन को जब असुर डुबाया, कर प्रबन्ध उन्हें ढुढवाया ।

मोहित बनकर खलहि नचाया, उसही कर से भस्म कराया ॥

असुर जलन्धर अति बलदाई, शंकर से उन कीन्ह लड़ाई ।

हार पार शिव सकल बनाई, कीन सती से छल खल जाई ॥

सुमिरन कीन तुम्हें शिवरानी, बतलाई सब विपत कहानी ।

तब तुम बने मुनीश्वर ज्ञानी, वृन्दा की सब सुरति भुलानी ॥

देखत तीन दनुज शैतानी, वृन्दा आय तुम्हें लपटानी ।

हो स्पर्श धर्म क्षति मानी, हना असुर उर शिव शैतानी ॥

तुमने ध्रुव प्रहलाद उबारे, हिरणाकुश आदिक खल मारे ।

गणिका और अजामिल तारे, बहुत भक्त भव सिन्धु उतारे ॥

हरहु सकल संताप हमारे, कृपा करहु हरि सिरजन हारे ।

देखहुं मैं निज दरश तुम्हारे, दीन बन्धु भक्तन हितकारे ॥

चाहता आपका सेवक दर्शन, करहु दया अपनी मधुसूदन ।

जानूं नहीं योग्य जब पूजन, होय यज्ञ स्तुति अनुमोदन ॥

शीलदया सन्तोष सुलक्षण, विदित नहीं व्रतबोध विलक्षण ।

करहुं आपका किस विधि पूजन, कुमति विलोक होत दुख भीषण ॥

करहुं प्रणाम कौन विधिसुमिरण, कौन भांति मैं करहु समर्पण ।

सुर मुनि करत सदा सेवकाई, हर्षित रहत परम गति पाई ॥

दीन दुखिन पर सदा सहाई, निज जन जान लेव अपनाई ।

पाप दोष संताप नशाओ, भव बन्धन से मुक्त कराओ ॥

सुत सम्पति दे सुख उपजाओ, निज चरनन का दास बनाओ ।

निगम सदा ये विनय सुनावै, पढ़ै सुनै सो जन सुख पावै ॥

॥ इति श्री विष्णु चालीसा ॥

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अस्वीकरण- इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। नईदुनिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। नईदुनिया अंधविश्वास के खिलाफ है।