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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 18, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Premanand Maharaj: भगवान को प्रसाद चढ़ाते समय किन बातों का रखें ध्‍यान, प्रेमानंद महाराज ने बताया सही तरीका

हिंदू धर्म में भगवान की पूजा के दौरान प्रसाद चढ़ाया जाता है। यह प्रसाद फल अथवा मिठाई के रूप में भगवान को अर्पित किया जाता है। पूजा खत्म होने के बाद यह...और पढ़ें

By Bharat MandhanyaEdited By: Bharat Mandhanya
Publish Date: Sun, 18 Aug 2024 07:00:00 PM (IST)Updated Date: Sun, 18 Aug 2024 07:00:58 PM (IST)
Premanand Maharaj: भगवान को प्रसाद चढ़ाते समय किन बातों का रखें ध्‍यान, प्रेमानंद महाराज ने बताया सही तरीका
पूजा के दौरान चढ़ाया जाता है प्रसाद।

इंदौर, धर्म डेस्क (Premanand Maharaj)। हिंदू धर्म में प्रसाद को काफी पवित्र माना जाता है और इसे सम्मान के साथ ग्रहण किया जाता है। भगवान को मिठाई और फल प्रसाद के रूप में चढ़ाए जाते हैं और पूजा पाठ के पास इसे लोगों में वितरित किया जाता है। हालांकि, भगवान को प्रसाद चढ़ाने के कई नियम भी बताए गए हैं, जिनका पालन करना जरूरी होता है।

दरअसल, भगवान को अक्सर फलों का भोग लगाया जाता है। भक्तों के बीच अक्सर यह आशंका रहती है कि फल बीज के साथ भगवान को अर्पित किए जाते हैं। इससे ये बीज भी प्रसाद बन जाते हैं, लेकिन प्रसाद ग्रहण करते समय इन बीजों को फेंक दिया जाता है। ऐसी स्थिति में क्या प्रसाद का अपमान होता है। इस सवाल का जवाब वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज ने दिया है।


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प्रेमानंद महाराज ने क्या कहा

प्रेमानंद महाराज का कहना है कि, जब हम भगवान आम का भोग लगाया जाता है, ताे पहले छिलके और गुठली निकाल ली जाती है और सिर्फ गुदा ही भगवान को चढ़ाया जाता है। महाराज का कहना है कि ऐसा सभी फलों के साथ करना चाहिए और भगवान को इसे अर्पित करने से पहले फल में से बीज निकाल लेना चाहिए।

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प्रेमानंद महाराज कहते हैं, जिस तरह हम बगैर बीज के फल खाते हैं, ठीक उसी तरह भगवान को भी बिना बीजों के फल अर्पित करना चाहिए। महाराज के अनुसार, यदि आप भगवान को खरबूजा अर्पित करें, तो इसके बीज निकाल लें और यदि तरबूज चढ़ाते हैं, तो इसे छोटे-छोटे पीस करके बीज निकालना चाहिए।

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डिसक्लेमर

'इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।'