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भरकापारा का काली माई मंदिर.. जहां दर्शन से तंत्र बाधा और रोगों का होता है नाश, मां के इसी आंगन में होती है छत्तीसगढ़ की पहली मड़ई

चमत्कार और आलौकिक शक्तियों का केंद्र है जिला मुख्यालय के मध्य में स्थित भरकापारा की मां काली माई मंदिर। जहां भक्तों के द्वारा मांगी गई हर मनोकामना पूर...और पढ़ें

By Rohit DewanganEdited By: manoj dubey
Publish Date: Sun, 22 Mar 2026 11:57:42 AM (IST)Updated Date: Sun, 22 Mar 2026 11:59:32 AM (IST)
भरकापारा का काली माई मंदिर.. जहां दर्शन से तंत्र बाधा और रोगों का होता है नाश, मां के इसी आंगन में होती है छत्तीसगढ़ की पहली मड़ई

HighLights

  1. मां त्रिपुर सुंदरी को तंत्र-मंत्र की देवी माना जाता है
  2. श्मशान काली की यहां स्थापित मुख्य प्रतिमा स्वयं भू है
  3. विदेशी भक्त प्रज्ज्वलित करते हैं आस्था की ज्योत

नईदुनिया न्यूज, राजनांदगांव। चमत्कार और आलौकिक शक्तियों का केंद्र है जिला मुख्यालय के मध्य में स्थित भरकापारा की मां काली माई मंदिर। जहां भक्तों के द्वारा मांगी गई हर मनोकामना पूर्ण होती है। मां त्रिपुर सुंदरी का यह रियासतकालीन मंदिर वैदिक और तंत्र अनुष्ठान का अनूठा संगम है।

मां त्रिपुर सुंदरी को तंत्र-मंत्र की देवी माना जाता है

मान्यता है कि तंत्र से परेशान लोग यहां मां काली माई के दर्शन कर तंत्र से छुटकारा पाते हैं। इसी तरह यंहा विराजमान मां काली शारीरिक और मानसिक रोगों से छुटकारा दिलाती हैं और यही वजह है कि शारीरिक व मानसिक परेशानी से जूझ रहे लोग इस मंदिर में दर्शन के लिए दूर दूर से आते हैं। मां त्रिपुर सुंदरी को तंत्र-मंत्र की देवी माना जाता है।


श्मशान काली की यहां स्थापित मुख्य प्रतिमा स्वयं भू है

ऐसी मान्यता है श्मशान काली की यहां स्थापित मुख्य प्रतिमा स्वयं भू है, जो काफी प्राचीन है। तकरीबन 100 वर्ष पूर्व 1930 में मंदिर का पूर्णोद्धार हुआ था तब देवी के सात स्वरूप यानी सत बहनी की स्थापना यहां हुई थी। उस दौरान मंदिर के पास स्थित सरोवर की खुदाई के समय वहां मौजूद मंदिर से ये सात देवियों की मूर्तियां मंदिर लाई गई थी।

यहां विराजमान मां काली की प्रतिमा सौम्य स्वरूप में है, जो इस मंदिर को अन्य काली मंदिरों से अलग बनाती है, क्योंकि देवी काली की मुद्रा अक्सर रौद्र स्वरूप में होती है। इसके अलावा तंत्र-मंत्र की जितनी भी पूजाएं होती हैं, वो इस चमत्कारिक मंदिर में सालों से होती आ रही हैं।

मां के इसी आंगन में होती है प्रदेश की पहली मड़ई

दीपावली के बाद छत्तीसगढ़ में मेले मड़ई का दौर शुरु हो जाता है, जो महाशिवरात्रि तक अनवरत चलता है। प्राचीन काल से छत्तीसगढ़ की प्रथम मड़ई मां काली के इसी आंगन में आयोजित हो रही है। यंहा दीवाली के बाद भाई दूज के दिन पुराना बस स्टैंड परिसर में मेला सजता सँवरता है।

जिसके बाद जिले सहित प्रदेश भर में मेले मड़ई का दौर शुरू हो जाता है। इसके अलावा बाना, बैरन, खप्पर, खड़ग की पूजा और छत्तीसगढ़ की परंपरागत पूजा पद्धति की रस्में इस देवालय में निरंतर निभाई जा रही है।

विदेशी भक्त प्रज्ज्वलित करते हैं आस्था की ज्योत

काली माई के इस दरबार में चैत्र और शारदीय नवरात्रि बड़े ही धूमधाम से मनाई जाती है। वही गुप्त नवरात्रि की पूजा नाम के अनुरुप गुप्त तरीके से सम्पन्न होती है। यहां नवरात्र में श्रद्धालु आस्था के साथ मनोकामना ज्योत प्रज्वलित करते हैं। विदेश के भक्तों की आस्था की ज्योत भी इस मंदिर में प्रज्ज्वलित होती है।

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607 ज्योति कलश जंवारा के साथ स्थापित किये गए हैं

इसके अलावा देश भर और छत्तीसगढ़ के विभिन्न स्थानों से लोग माई के दरबार में अपनी ज्योत प्रज्ज्वलित कराते हैं। मंदिर से जुड़े रघु शर्मा ने बताया कि नवरात्रि में इस वर्ष लग 607 ज्योति कलश जंवारा के साथ स्थापित किये गए हैं।

उन्होंने बताया कि मंदिर में राजनांदगांव जिले के अलावा छत्तीसगढ़ और पूरे देश भर से भक्त मनोमकामना ज्योत प्रज्ज्वलित करते हैं। यहां अमेरिका और लंदन में रहने वाले कई भी ज्योत प्रज्वलित करते हैं।

(नोटः यह धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। नईदुनिया इसकी पुष्टि नहीं करता है।)