
मनोरंजन/ धर्म डेस्क। नितेश तिवारी की फिल्म ‘रामायणम्’ में यश रावण के किरदार में नजर आए। फिल्म से जुड़े विजुअल्स में रावण का पुष्पक विमान भी चर्चा में है। इस विमान को देखकर एक सवाल उठता है कि क्या वाल्मीकि रामायण में भी पुष्पक विमान ऐसा ही बताया गया है? क्या वह आज के किसी हवाई जहाज जैसा था या फिर एक उड़ता हुआ महल?
दिलचस्प बात यह है कि वाल्मीकि रामायण में पुष्पक विमान का वर्णन किसी साधारण उड़ने वाली सवारी की तरह नहीं, बल्कि एक बेहद भव्य और दिव्य संरचना के रूप में मिलता है।
वाल्मीकि रामायण के अनुसार, पुष्पक विमान का निर्माण विश्वकर्मा ने ब्रह्मा के लिए किया था। बाद में ब्रह्मा ने इसे कुबेर को दे दिया। रावण ने कुबेर को हराकर यह विमान अपने अधिकार में ले लिया था।
सुंदरकांड के सर्ग 9 में हनुमान जब लंका में सीता की तलाश कर रहे होते हैं, तब उनकी नजर इस विमान पर पड़ती है। इसके वर्णन में सोने के खंभे, कीमती रत्न, सुंदर खिड़कियां, ऊंचे गुंबद और महल जैसी बनावट का जिक्र मिलता है। यानी ग्रंथ में पुष्पक विमान को एक उड़ते हुए भव्य महल की तरह कल्पित किया गया है।
पुष्पक विमान की सबसे खास बात उसकी गति और क्षमता थी। वाल्मीकि रामायणम् के अरण्यकांड में रावण सीता से कहता है कि उसके पास पुष्पक नाम का ऐसा विमान है, जो इच्छानुसार कहीं भी जा सकता है और जिसके जरिए वह आकाश में यात्रा करता है।
युद्धकांड में भी इसके दिव्य और चंद्रमा जैसी चमक वाले स्वरूप का उल्लेख है। एक और दिलचस्प बात यह है कि राम के अयोध्या लौटने के प्रसंग में विमान की क्षमता का वर्णन मिलता है कि उसमें यात्रियों के लिए जगह की कमी नहीं होती।
अब फिल्म की बात करें तो नितेश तिवारी ने बताया है कि पुष्पक विमान का अंतिम डिजाइन तय करने में करीब दो साल लगे। टीम ने इसके 40-50 अलग-अलग डिजाइन तैयार किए। उनका मकसद ऐसा विमान बनाना था जिसे देखकर लगे कि यह सचमुच उड़ सकता है। इसके डिजाइन में बदलाव के कारण रावण और जटायु के युद्ध वाले दृश्य पर भी दोबारा काम करना पड़ा।
इस तरह फिल्म का पुष्पक विमान प्राचीन ग्रंथ में बताए गए भव्य, उड़ने वाले महल की कल्पना को आधुनिक विजुअल इफेक्ट्स के जरिए पर्दे पर उतारने की कोशिश है। हालांकि, वाल्मीकि रामायण में इसका कोई एक तय तकनीकी नक्शा नहीं दिया गया है। इसलिए फिल्म का डिजाइन मूल वर्णन से प्रेरित सिनेमाई कल्पना है, उसकी हूबहू तस्वीर नहीं।
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