धर्म डेस्क, इंदौर। Shani Sade Sati: शनि देव अपने गोचर के दौरान हर राशि को प्रभावित करते हैं। कर्मफलदाता एक राशि में ढाई साल तक रहते हैं। छायापुत्र की विशेष स्थिति के कारण जब प्रभाव किसी राशि पर पड़ता है तो इसे साढ़ेसातीक कहते है। जब शनि किसी राशि के 12वें घर या उस राशि के दूसरे भाव में होता है, तो संबंधित राशि पर साढेसाती चल रही होती है। शनैश्चर एक राशि को तीन बार प्रभावित करते है। ढाई साल के तीन चरण साढ़े सात साल के रूप में चलते हैं।
यह भ्रांति है कि शनि देव सदैव अशुभ फल देते हैं, लेकिन यह सच नहीं है। सबसे पहले आपको अपनी जन्म कुंडली में शनि की स्थित देखनी होगी। तब समझ सकते है कि साढ़ेसाती अच्छी है या बुरी।
साढ़े साती का शुभ फल मिलने पर करियर में सफलता मिलती है। जातक को धन और बड़े पद की प्राप्ति होती है। साथ ही विदेश यात्रा की संभावना रहती है। अगर साढ़े साती अशुभ फल दे तो नौकरी छूट जाती है। स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होती हैं। साढ़े साती मानसिक स्थिति को बुरी तरह से प्रभावित करती है।
सुबह-शाम शनि मंत्र का जाप करें। शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। साथ ही हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। खाने में सरसों का तेल, गुड़ और काले चने का उपयोग करें। अपना व्यवहार और आचरण अच्छा रखें। अपने बाएं हाथ की मध्यमा उंगली में लोहे का छक्का पहनना चाहिए। शनिवार के दिन सूर्योदय से पहले या सूर्यास्त के बाद शनि की पूजा करना लाभकारी होता है।
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