
धर्म डेस्क। चाणक्य नीति की तरह ही महात्मा विदुर के विचार और उनकी नीतियां (विदुर नीति) जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए मार्गदर्शक मानी जाती हैं। महाभारत काल के महान विद्वान विदुर जी ने मानव कल्याण और उन्नति के लिए कई महत्वपूर्ण सूत्र दिए हैं, जो आज के समय में भी उतने ही प्रासंगिक हैं।
विदुर जी के अनुसार, सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। जो व्यक्ति अपने लक्ष्य के प्रति पूरी तरह समर्पित होता है और ईमानदारी व लगन से कड़ी मेहनत करता है, उसे ऊंचाइयों पर पहुंचने से कोई नहीं रोक सकता। ऐसा व्यक्ति चुनौतियों से डरने के बजाय उनका डटकर सामना करता है। इसके उलट, आलस्य को मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु माना गया है। जो व्यक्ति काम को कल पर टालता है, वह हाथ आए अवसरों को भी गंवा देता है।
विदुर नीति स्पष्ट करती है कि छल, झूठ और धोखे से प्राप्त की गई सफलता क्षणिक होती है। अनैतिक रास्तों से मिली तरक्की ना तो आत्म-संतुष्टि देती है और न ही समाज में सम्मान। जो व्यक्ति अपने सिद्धांतों और नैतिकता पर अडिग रहता है, उसकी प्रगति की गति भले ही धीमी हो, लेकिन वह स्थायी होती है। ऐसे व्यक्ति को समाज में आदर और यश की प्राप्ति होती है।
आर्थिक संपन्नता के लिए केवल धन कमाना ही पर्याप्त नहीं है। विदुर जी के अनुसार, व्यक्ति को धन की बचत और उसके सही उपयोग की गहरी समझ होनी चाहिए। जो अपनी मेहनत की कमाई को बिना सोचे-समझे व्यर्थ के कार्यों में खर्च कर देता है, उसे भविष्य में कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसके उलट, जो व्यक्ति बचत और सही निवेश पर ध्यान देता है, उसे कठिन समय में कभी किसी के आगे हाथ नहीं फैलाने पड़ते।
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