
धर्म डेस्क। Year Ender 2025: भारतीय परंपरा में विवाह को केवल सामाजिक रिश्ता नहीं, बल्कि सोलह संस्कारों में एक महत्वपूर्ण संस्कार माना गया है। देश के अलग-अलग हिस्सों में विवाह की विधियां अलग हो सकती हैं, लेकिन उनका उद्देश्य जीवन को धार्मिक और आध्यात्मिक आधार देना होता है। वैदिक विवाह जहां हिंदू धर्म की सबसे प्राचीन परंपरा है, वहीं भूत शुद्धि विवाह योगिक परंपरा से जुड़ा एक विशिष्ट अनुष्ठान माना जाता है। साल 2025 में ये दोनों विवाह पद्धतियां खास वजहों से चर्चा में रहीं।
वैदिक विवाह
वैदिक विवाह हिंदू धर्म का सबसे पुराना और मूल विवाह संस्कार माना जाता है। इसका उल्लेख ऋग्वेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद जैसे प्राचीन ग्रंथों में मिलता है। यह विवाह मंत्रोच्चारण, पवित्र अग्नि और पारंपरिक विधियों के साथ संपन्न होता है। इसका उद्देश्य धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के मार्ग पर चलते हुए गृहस्थ जीवन की शुरुआत करना और उत्तम संतान की प्राप्ति माना गया है।

इस विवाह में कन्यादान, पाणिग्रहण और अग्नि के फेरे प्रमुख रस्में होती हैं। फेरों के दौरान पति-पत्नी जीवनभर धर्म और सत्य के पालन की जिम्मेदारी निभाने का संकल्प लेते हैं। यह संस्कार दोनों को जीवनभर एक-दूसरे के प्रति समर्पित करता है और धार्मिक कर्तव्यों के योग्य बनाता है।
भूत शुद्धि विवाह
भूत शुद्धि विवाह एक प्राचीन योगिक परंपरा पर आधारित अनुष्ठान है, जिसका मुख्य उद्देश्य आध्यात्मिक शुद्धि माना जाता है। भूत शुद्धि का अर्थ है पंचतत्वों का शुद्धिकरण, जो शरीर, मन और ऊर्जा का आधार होते हैं। इस विवाह में भावनात्मक और शारीरिक सीमाओं से ऊपर उठकर आध्यात्मिक स्तर पर मिलन को महत्व दिया जाता है। मान्यता है कि यह विवाह वैवाहिक जीवन में संतुलन और शांति लाता है।

इस विधि में दूल्हा-दुल्हन ध्यान और साधना से जुड़ी रस्में निभाते हैं। पवित्र अग्नि के चारों ओर मंत्रोच्चारण के साथ पंचतत्वों की शुद्धि की परिक्रमा की जाती है। यह विवाह आमतौर पर शांत, सादा और सीमित लोगों की मौजूदगी में संपन्न होता है।