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इंदौर के प्रसिद्ध देवी धामों की अनूठी परंपराएं, बेटियों को शिक्षित करने से लेकर पीतल चढ़ाने तक की मान्यताएं

ऐसे में यूं तो शहर के हर क्षेत्र में शक्ति की उपासना स्थल मौजूद हैं लेकिन इसमें कुछ का इतिहास, अनूठा स्वरूप, मान्यता और पूजन पद्धति और भी खास बनाती है...और पढ़ें

By ramkrashna MuleEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sat, 10 Oct 2026 08:32:39 PM (IST)Updated Date: Sat, 10 Oct 2026 08:32:39 PM (IST)
इंदौर के प्रसिद्ध देवी धामों की अनूठी परंपराएं, बेटियों को शिक्षित करने से लेकर पीतल चढ़ाने तक की मान्यताएं
इंदौर के प्रसिद्ध देवी धामों की अनूठी परंपराएं।

HighLights

  1. हरसिद्धि में 8 पीढ़ियों से बेटी-दामाद को पूजा का हक
  2. एमटीएच कंपाउंड मंदिर में चढ़ा 3000 किग्रा पीतल
  3. खजराना में प्रदेश की सबसे ऊंची काली प्रतिमा स्थापित

रामकृष्ण मुले, नईदुनिया, इंदौर। नवरात्र का आगमन केवल पर्व की शुरुआत नहीं, बल्कि आस्था, उल्लास और शक्ति की उपासना का महापर्व है। ऐसे में यूं तो शहर के हर क्षेत्र में शक्ति की उपासना स्थल मौजूद हैं लेकिन इसमें कुछ का इतिहास, अनूठा स्वरूप, मान्यता और पूजन पद्धति और भी खास बनाती है।

बिजासन माता मंदिर में माता के अलग-अलग स्वरूप पिंडियों के रूप में विराजित हैं जिनसे भक्तों को संबल मिलता है, तो वैष्णवधाम में बेटियों को शिक्षित करने की पहल चलाई जा रही है। ऐसे ही दुर्गा माता मंदिर में भक्त श्रद्धा से पीतल अर्पित करते हैं, तो हरसिद्धि मंदिर में पूजन का अधिकार बेटी और दामाद को कई पीढ़ियों से दिया जा रहा है।


एक हजार साल पुराना बिजासन माता मंदिर का इतिहास

शहर के प्रमुख माता मंदिरों में से एक बिजासन माता मंदिर का इतिहास एक हजार साल पुराना है। पुजारी सतीश वन बताते हैं कि यहां देवी के नौ स्वरूप पिंडियों के रूप में विद्यमान हैं। माता पहले ओटले पर विराजित थीं, जिसका 1760 में महाराजा शिवाजीराव होलकर ने जीर्णोद्धार कराया था। मंदिर में चैत्र और शारदीय नवरात्र में मेला लगता है, जिसमें हजारों लोग शामिल होकर माता के दर्शन और पूजन करते हैं।

अन्नपूर्णा माता का दिन में तीन बार होता श्रृंगार

शहर के अन्नपूर्णा रोड स्थित संगमरमर से बने अन्नपूर्णा मंदिर की आभा चांदनी रात में देखते ही बनती है। यहां माता की तीन फीट ऊंची मूर्ति का मनोहारी स्वरूप देखते ही बनता है। नवरात्र में हर दिन माता का तीन बार श्रृंगार होता है। ट्रस्टी श्याम सिंघल बताते हैं कि 81 फीट ऊंचे मंदिर में 51 स्तंभों पर सनातन की महिमा का गुणगान करती 1250 मूर्तियां हैं।

प्रदेश की सबसे ऊंची काली माता की मूर्ति

खजराना स्थित काली माता मंदिर में प्रदेश की सबसे ऊंची मां काली की प्रतिष्ठित मूर्ति विराजित है। तंत्र साधना के लिए ख्यात इस स्थान पर नवरात्र में माता का दूध से प्रतीकात्मक अभिषेक कर सैकड़ों लीटर दूध आसपास के जरूरतमंद बच्चों को प्रसाद के रूप में दिया जाता है। पुजारी गुलशन अग्रवाल के मुताबिक देश के कुछ ही मंदिरों में इतनी बड़ी मूर्ति विराजित है।

हरसिद्धि मंदिर में आठ पीढ़ियों से बेटी-दामाद को अधिकार

हरसिद्धि स्थित प्राचीन हरसिद्धि मंदिर में पूजन का अधिकार आठ पीढ़ियों से बेटी-दामाद को दिया जा रहा है। पं. सुनील शुक्ला बताते हैं कि होलकर ट्रस्ट द्वारा संचालित इस पूजन की जिम्मेदारी 1766 में वंशानुगत सनद द्वारा पं. जनार्दन भट्ट को सौंपी गई थी। इसके बाद तीसरी पीढ़ी से यह जिम्मेदारी बेटियों ने ही संभाली। यहां माता का महिषासुर मर्दिनी स्वरूप है।

वैष्णवधाम से बेटियों को शिक्षित करने की पहल

बिचौली मर्दाना स्थित वैष्णवधाम में मां दुर्गा, काली और सरस्वती की मनोहारी मूर्तियां 2004 से प्रतिष्ठित हैं। मंदिर से कई सामाजिक गतिविधियों का संचालन वर्षों से किया जा रहा है। जागृति महिला मंडल द्वारा यहां से विभिन्न सेवा कार्य किए जा रहे हैं। इसमें बेटियों को शिक्षित करने का सेवा कार्य भी शामिल है। संस्था के विनोद अहलूवालिया के अनुसार इसका लाभ कई बच्चे उठा रहे हैं।

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अनूठा दुर्गा मंदिर जहां चढ़ता है पीतल

शहर में एक अनूठा पीतल जड़ित दुर्गा माता मंदिर एमटीएच कंपाउंड में स्थित है। इसमें संतोषी माता, कालका माता, लक्ष्मी, मां सरस्वती एवं गायत्री माता की मूर्तियां विराजित हैं। इस मंदिर में भक्तों द्वारा अर्पित किए गए पीतल से मंदिर को पीतल जड़ित किया गया है। यहां अब तक 3 हजार किलो से अधिक पीतल चढ़ाया जा चुका है। यह मंदिर पचास साल पुराना है।

नवरात्र में कहीं 24 लाख गायत्री महामंत्र का जाप तो कहीं सग्रहमख महायज्ञ

  • कनाड़िया स्थित गुरुधाम गायत्री शक्तिपीठ में प्रतिदिन अखंड दीप के समक्ष 24 लाख गायत्री महामंत्र का जाप किया जाएगा। जाप की शुरुआत घट स्थापना के साथ सुबह 9 बजे होगी।
  • श्रीविद्याधाम एरोड्रम रोड पर प्रतिदिन सुबह 9 से 12 बजे तक सग्रहमख महायज्ञ एवं दोपहर 2 बजे से दुर्गा पाठ एवं शतचंडी महायज्ञ होगा।
  • शंकराचार्य मठ दिलीप नगर में नौ दिवसीय नवरात्र महोत्सव ब्रह्मचारी गिरीशानंद महाराज के सानिध्य में मनाया जाएगा। प्रतिदिन दर्शन-पूजन सुबह 10 से दोपहर 1 बजे एवं रात 8 से रात्रि 12 बजे तक होगा।