
धर्म डेस्क। घर के मुख्य दरवाजे पर घोड़े की नाल लगाना सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि इसे घर की सकारात्मक ऊर्जा का रक्षक भी माना जाता है। सदियों से लोग अपने घर, दुकान और व्यापारिक प्रतिष्ठानों के बाहर घोड़े की नाल टांगते आ रहे हैं।
मान्यता है कि सही नियमों के साथ लगाई गई घोड़े की नाल घर में सुख, शांति और समृद्धि लाती है, जबकि नकारात्मक शक्तियों को दूर रखती है। आइए जानते हैं घोड़े की नाल से जुड़ी मान्यताएं, इसके फायदे और इसे लगाने का सही तरीका।
घोड़े की नाल लोहे से बनी होती है और प्राचीन समय से लोहा बुरी शक्तियों को दूर भगाने वाला माना गया है। वास्तु और लोक मान्यताओं के अनुसार, आग में तपकर बना लोहा नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करने की क्षमता रखता है। यही वजह है कि घोड़े की नाल को घर की सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है।
घोड़े की नाल का ‘U’ आकार बढ़ते हुए चंद्रमा जैसा माना जाता है, जो प्रगति और खुशहाली का संकेत है। मान्यता है कि यदि नाल को इस तरह लगाया जाए कि उसका खुला हिस्सा ऊपर की ओर हो, तो वह सौभाग्य और सकारात्मक ऊर्जा को एक पात्र की तरह संजोकर रखती है।
पुरानी मान्यताओं के अनुसार, जहां घोड़े की नाल लगी होती है, वहां नकारात्मक शक्तियां प्रवेश नहीं कर पातीं। इसी कारण इसे नजर दोष से बचाव का प्रभावी उपाय भी माना जाता है।
किस नाल का करें उपयोग - वास्तु शास्त्र के अनुसार, घोड़े के पैर से निकली हुई पुरानी नाल अधिक प्रभावशाली मानी जाती है, क्योंकि उसमें पृथ्वी और जीव की ऊर्जा समाहित होती है।
लगाने का शुभ दिन - शनिवार को घोड़े की नाल लगाना सबसे उत्तम माना गया है, क्योंकि लोहा शनि देव से जुड़ा होता है और इससे शनि दोष के प्रभाव भी कम होते हैं।
सही दिशा - घर के मुख्य दरवाजे के ऊपर बीच में या उत्तर-पश्चिम दिशा में नाल लगाना करियर, धन और भाग्य के लिए शुभ माना जाता है।
कैसे लगाएं - अधिकतर वास्तु विशेषज्ञ घोड़े की नाल को ‘U’ आकार में, यानी खुला हिस्सा ऊपर की ओर रखने की सलाह देते हैं।
यदि घोड़े की नाल को श्रद्धा और सही वास्तु नियमों के अनुसार लगाया जाए, तो यह घर के लिए एक शक्तिशाली सुरक्षा कवच बन सकती है और सकारात्मक ऊर्जा को बनाए रखने में मदद करती है।