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मृत्यु से पहले क्यों किया जाता है गौ दान? गरुड़ पुराण में बताया गया है कारण

Garuda Purana: हिंदू धर्मग्रंथों में गरुड़ पुराण को मृत्यु और उसके बाद आत्मा की यात्रा का विस्तृत वर्णन करने वाला प्रमुख ग्रंथ माना जाता है। इसी ग्रंथ...और पढ़ें

By Himadri Singh HadaEdited By: Himadri Singh Hada
Publish Date: Sat, 10 Jan 2026 08:29:07 AM (IST)Updated Date: Sat, 10 Jan 2026 08:29:07 AM (IST)
मृत्यु से पहले क्यों किया जाता है गौ दान? गरुड़ पुराण में बताया गया है कारण
मृत्यु से पहले गौ दान का महत्व।

HighLights

  1. मृत्यु से पहले गौ दान का महत्व।
  2. पापों से मुक्ति और सद्गति का मार्ग।
  3. यहां पढ़ें गौ दान की सही विधि।

धर्म डेस्क। हिंदू धर्मग्रंथों में गरुड़ पुराण को मृत्यु और उसके बाद आत्मा की यात्रा का विस्तृत वर्णन करने वाला प्रमुख ग्रंथ माना जाता है। इसी ग्रंथ में मृत्यु से पहले किए जाने वाले ‘गौ दान’ का विशेष महत्व बताया गया है।

मान्यता है कि जीवन के अंतिम समय में श्रद्धा और निस्वार्थ भाव से किया गया गौ दान आत्मा की परलोक यात्रा को सरल बनाता है और उसे कष्टों से मुक्ति दिलाता है।

गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु के बाद आत्मा को यमलोक की कठिन और भयावह यात्रा करनी पड़ती है। इस मार्ग में वैतरणी नामक एक भयानक नदी आती है, जिसे पार करना अत्यंत कष्टदायक बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार यह नदी रक्त, मवाद और गंदगी से भरी होती है, जहां पापी आत्माओं को भारी यातनाएं सहनी पड़ती हैं।


धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, जो व्यक्ति अपने जीवनकाल में या मृत्यु से ठीक पहले गौ दान करता है, उसके पुण्य फलस्वरूप वही गाय वैतरणी नदी के तट पर उसकी सहायता के लिए उपस्थित होती है। कहा जाता है कि आत्मा गाय की पूंछ पकड़कर बिना कष्ट के इस भयानक नदी को पार कर लेती है।

पापों से मुक्ति और सद्गति का मार्ग

  • शास्त्रों में गाय को माता का दर्जा दिया गया है और यह भी माना जाता है कि उसके शरीर में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास होता है। इसी कारण गौ दान को अत्यंत पुण्यकारी माना गया है।
  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गौ दान मृत्यु के समय होने वाले शारीरिक और मानसिक कष्टों को कम करता है।
  • यमलोक की कठिन यात्रा में आत्मा को भूख-प्यास और भय से राहत मिलती है।
  • निस्वार्थ भाव से किया गया गौ दान अनजाने में किए गए पापों का प्रायश्चित कर मोक्ष की ओर मार्ग प्रशस्त करता है।

गौ दान की सही विधि

गरुड़ पुराण में कहा गया है कि दान हमेशा सुपात्र को ही देना चाहिए। दान में दी जाने वाली गाय स्वस्थ और दूध देने वाली हो, तो उसे सर्वोत्तम माना गया है। यदि किसी कारणवश साक्षात गाय का दान संभव न हो, तो उसके प्रतीक रूप में स्वर्ण या धन का दान भी पुण्य फल प्रदान करता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गौ दान न केवल परलोक में आत्मा की रक्षा करता है, बल्कि जीवन में भी पुण्य, शांति और सद्गति का मार्ग खोलता है।