
पितृ पक्ष 2026। माना जाता है कि इससे पूर्वज नाराज हो सकते हैं। पितृ पक्ष के दौरान कुछ चीजें खरीदने से बचने की धार्मिक मान्यता है। जानें वे कौन सी 5 चीजें हैं जिन्हें इस दौरान घर लाने से बचा जाता है और इसके पीछे क्या मान्यता है। हिंदू धर्म में पितृ पक्ष को पूर्वजों को याद करने और उनके प्रति आस्था जताने का समय माना जाता है। इस दौरान तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध, ब्राह्मण भोजन और दान जैसी परंपराएं निभाई जाती हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष के दौरान सादगी और संयम बनाए रखना चाहिए। इस दौरान कुछ चीजें खरीदने से बचने की भी परंपरा है। तो आइए जानते हैं उन चीजों के बारे में जिन्हें पितृ पक्ष के दौरान घर लाने से बचा जाता है।
नए कपड़े और सोने-चांदी के गहने पितृ पक्ष को आमतौर पर जश्न मनाने या भौतिक सुख-सुविधाएं पाने का समय नहीं माना जाता है। इन दिनों पूर्वजों को याद करने और उनके लिए धार्मिक अनुष्ठान करने पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। इसलिए माना जाता है कि अपने लिए नए कपड़े, सोने-चांदी के गहने या शौक की दूसरी चीज़ें खरीदने से बचना चाहिए। हालांकि, पुरखों के नाम पर किसी ज़रूरतमंद व्यक्ति या ब्राह्मण को दान करने के लिए कपड़े खरीदने में कोई आपत्ति नहीं है।
कार, बाइक, घर, दुकान या ज़मीन जैसी कोई बड़ी खरीदारी ज़िंदगी में एक नई शुरुआत से जुड़ी होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष के दौरान ऐसे नए काम शुरू करने से बचा जाता है। इस वजह से, बहुत से लोग इस समय के खत्म होने के बाद ही गाड़ी या प्रॉपर्टी खरीदना पसंद करते हैं।
वास्तु से जुड़ी मान्यताओं में, झाड़ू को घर की खुशहाली और देवी लक्ष्मी से जोड़ा जाता है। पितृ पक्ष के दौरान नई झाड़ू खरीदकर घर लाने से बचने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता है कि इस दौरान झाड़ू खरीदने से घर की फाइनेंशियल हालत पर बुरा असर पड़ सकता है और फालतू खर्चे बढ़ सकते हैं।
कुछ धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृ पक्ष के दौरान लोहे या लोहे से बनी नई चीज़ें खरीदने से भी बचना चाहिए। खासकर श्राद्ध कर्म के दौरान लोहे के बर्तनों या दूसरी धातुओं के इस्तेमाल को लेकर अलग-अलग परंपराएं हैं। मान्यता के अनुसार, इस दौरान लोहे का नया सामान घर लाने से जीवन में अशांति या मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
TV, फ्रिज, सोफा, बेड या घर की सजावट जैसी महंगी चीजें भौतिक सुख-सुविधाओं से जुड़ी होती हैं। चूंकि पितृ पक्ष के दौरान सादगी और संयम को महत्व दिया जाता है, इसलिए ऐसी नई चीजें खरीदने से बचने की मान्यता है। हालांकि, यह एक धार्मिक मान्यता है और इसका पालन व्यक्तिगत आस्था और परंपरा पर आधारित है।
2026 में पितृ पक्ष 10 अक्टूबर को सर्व पितृ अमावस्या के साथ खत्म होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिन लोगों की श्राद्ध तिथि पक्की नहीं है, उनके लिए सर्वपितृ अमावस्या के दिन श्राद्ध, तर्पण और दान करना महत्वपूर्ण माना जाता है।