• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • AI बूटकैंप
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • गणेशोत्‍सव 2026
  • हनुमान अंश
  • Mutual Funds मास्टरी
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • मानसून
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • धर्म
  • कहते हैं

Shardiya Navratri 2025: क्यों मनाया जाता है शारदीय नवरात्र, कैसे हुई थी शुरुआत? जानें पूरी कहानी

इस साल 22 सितंबर से शारदीय नवरात्र (Shardiya navratri 2025) की शुरुआत हो चुकी है जो 1 अक्टूबर तक चलने वाला है। इसी अवधि में दुर्गा पूजा का पर्व भी मना...और पढ़ें

By Dheeraj BelwalEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Tue, 23 Sep 2025 08:07:57 PM (IST)Updated Date: Tue, 23 Sep 2025 08:07:57 PM (IST)
Shardiya Navratri 2025: क्यों मनाया जाता है शारदीय नवरात्र, कैसे हुई थी शुरुआत? जानें पूरी कहानी
Shardiya Navratri 2025: क्यों मनाया जाता है शारदीय नवरात्र?

HighLights

  1. 22 सितंबर से नवरात्र की हो चुकी है शुरुआत
  2. देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की होती है पूजा-अर्चना
  3. शारदीय नवरात्र की शुरुआत कैसे और कब हुई?

धर्म डेस्क। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक मनाया जाने वाला शारदीय नवरात्र (Shardiya navratri 2025), जिसे महानवरात्र या दुर्गा पूजा भी कहा जाता है, शक्ति साधना का सबसे प्रमुख पर्व माना जाता है। इसकी उत्पत्ति उस ऐतिहासिक प्रसंग से जुड़ी है, जब भगवान श्रीराम ने रावण पर विजय प्राप्त करने हेतु मां दुर्गा की उपासना की थी।

अकाल बोधन की कथा

त्रेतायुग में जब श्रीराम लंका युद्ध के लिए तैयार हुए, तब देवताओं ने उन्हें विजय की कामना से मां दुर्गा की आराधना करने का सुझाव दिया। सामान्यतः नवरात्र की पूजा चैत्र और आश्विन मास में होती है, लेकिन उस समय दक्षिणायन का काल चल रहा था, जब देवता योगनिद्रा में रहते हैं। ऐसे समय में पूजा करना शास्त्र सम्मत नहीं था।


तब भी श्रीराम ने संकट की घड़ी में मां दुर्गा का "अकाल बोधन" किया, अर्थात उन्हें समय से पहले जगाकर आराधना की। गहन श्रद्धा और शुद्ध मन से की गई इस उपासना से मां दुर्गा प्रसन्न हुईं और श्रीराम को विजय का आशीर्वाद दिया। इसके फलस्वरूप दशमी के दिन रावण का वध हुआ और यह तिथि "विजयादशमी" या "दशहरा" कहलाने लगी।

परंपरा का आरंभ

इसी प्रसंग के बाद शारदीय नवरात्र की परंपरा शुरू हुई। मान्यता है कि संकट और संघर्ष के समय मां दुर्गा की भक्ति से शक्ति, धैर्य और विजय की प्राप्ति होती है। तभी से आश्विन शुक्ल पक्ष के नवरात्र को विशेष महत्व दिया जाता है और इसे शक्ति साधना का श्रेष्ठ अवसर माना जाता है।

सांस्कृतिक विविधता

  • शारदीय नवरात्र केवल धार्मिक उत्सव ही नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • बंगाल में यह दुर्गा पूजा के रूप में मनाया जाता है, जहां भव्य पंडाल, कलात्मक प्रतिमाएं और अद्भुत सजावट इसकी विशेषता है।
  • गुजरात और महाराष्ट्र में गरबा और डांडिया की धुन पर नौ रातें रंग-बिरंगी छटा बिखेर देती हैं।
  • उत्तर भारत में रामलीला और दशहरा के मंचन से श्रीराम की गाथा जीवंत हो उठती है और रावण-दहन के साथ उत्सव अपने चरम पर पहुंचता है।

यह भी पढ़ें- Shardiya Navratri 2025: 2 बार नहीं साल में 4 बार आती है नवरात्रि, जानिए सबका धार्मिक महत्व

नवरात्र का संदेश

इस प्रकार, शारदीय नवरात्र न केवल शक्ति की उपासना का पर्व है, बल्कि यह भक्ति, आस्था और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक भी है। यह हमें सिखाता है कि श्रद्धा और साहस के बल पर जीवन के हर संघर्ष में विजय पाई जा सकती है।