Maa Ganga: जब मां गंगा के प्रकट होने से पृथ्वी का हो सकता था विनाश, जानिए पौराणिक कथा
भागीरथ ने अपने पूर्वजों को मोक्ष दिलाने के लिए देवी गंगा की कठोर तपस्या की और उनसे पृथ्वी पर अवतरित होने की प्रार्थना की। ...और पढ़ें
By Ekta SharmaEdited By: Ekta Sharma
Publish Date: Mon, 13 May 2024 05:03:02 PM (IST)Updated Date: Mon, 13 May 2024 05:03:02 PM (IST)
मां गंगा से जुड़ी पौराणिक कथा।HighLights
- भोलेनाथ को गंगाधर नाम से भी जाना जाता है।
- भागीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा पृथ्वी पर आने को तैयार हो गईं।
- शिव जी ने देवी गंगा को अपनी जटाओं में धारण किया था।
धर्म डेस्क, इंदौर। Maa Ganga: शास्त्रों में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं और अपने भक्त ही हर मनोकामना पूरी करते हैं। भोलेनाथ को गंगाधर नाम से भी जाना जाता है, लेकिन उनका यह नाम क्यों पड़ा, आज हम आपको इस बारे में बताने जा रहे हैं। आइए जानते हैं कि भगवान शंकर को यह दिव्य नाम कैसे मिला।
भागीरथ से प्रसन्न हुई थीं मां गंगा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी गंगा पहले स्वर्ग में निवास करती थीं, लेकिन भागीरथ ने अपने पूर्वजों को मोक्ष दिलाने के लिए देवी गंगा की कठोर तपस्या की और उनसे पृथ्वी पर अवतरित होने की प्रार्थना की। भागीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा पृथ्वी पर आने को तैयार हो गईं, लेकिन उनकी धारा का प्रवाह इतना तेज था कि पृथ्वी और उस पर रहने वाले लोग इसे सहन नहीं कर पाते।
इससे पूरी दुनिया का विनाश हो सकता है। इस विनाश से बचने के लिए भागीरथ भगवान ब्रह्मा के पास गए, जिसका समाधान ब्रह्मदेव ने स्वयंभू को बताया।
इस कारण शिव जी कहलाए गंगाधर
इसके बाद भागीरथ ने तपस्या करके भोलेनाथ को प्रसन्न किया। पृथ्वी को इस समस्या से बचाने के लिए भगवान शिव ने अपनी जटाएं खोल दीं और इस प्रकार देवी गंगा स्वर्ग लोक से अवतरित हुईं और भगवान शिव की जटाओं में समाहित हो गईं। भोलेनाथ की जटा पर आते ही देवी की गति कम हो गई और फिर मां गंगा धरती पर प्रकट हुईं। शिव जी ने देवी गंगा को अपनी जटाओं में धारण किया था, इसलिए भगवान शिव का नाम गंगाधर पड़ा।
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