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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 06, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Anant Chaturdashi 2025 पर भगवान विष्णु-गणेश की कृपा पाने के लिए जानें पूजा नियम और विसर्जन मुहूर्त

Anant Chaturdashi 2025 Puja Vidhi: अनंत चतुर्दशी 2025 गणेश चतुर्थी के 10 दिवसीय उत्सव का अंतिम दिन है। इस दिन भगवान विष्णु और गणपति बप्पा की विशेष पूज...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Akash Sharma
Publish Date: Sat, 06 Sep 2025 08:28:49 AM (IST)Updated Date: Sat, 06 Sep 2025 08:28:49 AM (IST)
Anant Chaturdashi 2025 पर भगवान विष्णु-गणेश की कृपा पाने के लिए जानें पूजा नियम और विसर्जन मुहूर्त
Anant Chaturdashi 2025: अनंत चतुर्दशी 2025 पूजन विधि और मंत्र

HighLights

  1. अनंत चतुर्दशी 2025 पूजन विधि और मंत्र
  2. गणपति विसर्जन 2025 शुभ मुहूर्त विस्तार
  3. भगवान विष्णु की अनंत स्वरूप पूजा विधि

धर्म डेस्क: अनंत चतुर्दशी 2025 (Anant Chaturdashi 2025) का पर्व 6 सितंबर को पूरे देश में धूमधाम और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। यह पर्व गणेश चतुर्थी के 10 दिवसीय उत्सव का अंतिम दिन होता है और इसी दिन गणपति विसर्जन भी किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप और गणपति बप्पा की पूजा करने से सभी दुख दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

अनंत चतुर्दशी की पूजा विधि (Anant Chaturdashi Puja Vidhi)

सुबह स्नान कर पीले वस्त्र धारण करें और भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा का संकल्प लें। एक चौकी पर विष्णु प्रतिमा स्थापित करें और उसके पास कलश रखें जिस पर स्वास्तिक बनाएं। पूजा में अनंत सूत्र का विशेष महत्व है, इसे भगवान के चरणों में अर्पित करें। पीले फूल, तुलसी दल, चंदन, फल और मिठाई चढ़ाएं। इसके बाद "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करें और अंत में आरती करें।


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गणेश विसर्जन शुभ मुहूर्त (6 सितंबर 2025)

प्रातः मुहूर्त: सुबह 07:36 से 09:10 बजे तक

मध्यकाल मुहूर्त: दोपहर 12:17 से शाम 04:59 बजे तक

सायाह्न मुहूर्त (लाभ): शाम 06:37 से रात 08:02 बजे तक

रात्रि मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर): रात 09:28 से 01:45 (7 सितंबर)

उषाकाल मुहूर्त (लाभ): सुबह 04:36 से 06:02 बजे तक (7 सितंबर)

गणपति विसर्जन विधि

विसर्जन से पहले बप्पा की अंतिम पूजा करें। मोदक, लड्डू और फूल अर्पित करें। परिवार के साथ आरती करें और क्षमा प्रार्थना करें। "गणपति बप्पा मोरया" बोलते हुए बप्पा की प्रतिमा को श्रद्धापूर्वक जल में विसर्जित करें।

पूजन मंत्र

"ॐ अनंताय नमः"

"वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥"