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अनंत चतुर्दशी 2026: गणेश जी के शरीर का तापमान बहुत बढ़ गया था, जानें क्‍या है यह पौराणिक कहानी

भाद्र महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को अनंत चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है। इस बार अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर को है। आइए जानते हैं अनंत चतुर्दशी के ...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Wed, 23 Sep 2026 03:43:14 PM (IST)Updated Date: Wed, 23 Sep 2026 03:49:30 PM (IST)
अनंत चतुर्दशी 2026: गणेश जी के शरीर का तापमान बहुत बढ़ गया था, जानें क्‍या है यह पौराणिक कहानी
महाभारत का लेखन करते श्रीगणेश जी एवं समीप बैठे महर्षि वेद व्‍यास।

HighLights

  1. भगवान विष्णु ने इन सभी लोकों की रक्षा के लिए अनंत रूप धारण किया।
  2. इस दिन व्रत रखने वाले इंसान को विष्णु सहस्रनाम मंत्र का जाप करना चाहिए।
  3. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत प्रथम महाभारत काल में हुआ था।

अनंत चतुर्दशी 2026: भाद्र महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को अनंत चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है। इस बार अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर को है। अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति का विसर्जन किया जाता है। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान श्री हरि के अनंत रूप की पूजा की जाती है और उसके बाद लोग उनके हाथों में अनंत बांधते हैं। आइए इस त्योहार के बारे में डिटेल में जानकारी लेते हैं और यह भी जानते हैं कि इस दिन गणपति का विसर्जन क्यों किया जाता है।

यह दिन क्यों मनाया जाता है?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा और व्रत किया जाता है। उसके बाद हाथ में अनंत सूत्र या अनंत बांधा जाता है। महिलाएं बाएं हाथ में और पुरुष दाएं हाथ में अनंत पहनते हैं। यह अनंत सूत्र लंबी उम्र और हमेशा रहने का प्रतीक माना जाता है।


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अनंत चतुर्दशी का महत्व

  • सनातन धर्म को मानने वाले लोग अनंत चतुर्दशी का त्योहार पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाते हैं। ऐसा माना जाता है कि अनंत चतुर्दशी के दिन ही भगवान विष्णु ने ब्रह्मांड बनाने के लिए 14 लोगों को बनाया था।
  • ये 14 लोग हैं तल, अतल, वितल, सुतल, सलतल, रसातल, पाताल, पृथ्वी, भव:, स्व:, जन, तप, सत्य, महा। इसलिए भगवान विष्णु ने इन सभी लोकों की रक्षा के लिए अनंत रूप धारण किया।
  • इस वजह से भगवान अनंत रूप में दिखाई देने लगे। इस व्रत को सही तरीके से करने से इंसान के सारे दुख दूर हो जाते हैं। इस दिन व्रत रखने वाले इंसान को विष्णु सहस्रनाम मंत्र का जाप करना चाहिए।

  • ऐसा करने वाले हर इंसान की मनोकामना पूरी होती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत सबसे पहले महाभारत काल में शुरू किया गया था।
  • इसलिए अनंत चतुर्दशी पर गणपति का विसर्जन किया जाता है

    गणेश चतुर्थी के दिन स्थापित किए गए गणपति का विसर्जन अनंत चतुर्दशी के दिन किया जाता है। इसके पीछे पौराणिक कहानी यह है कि जिस दिन वेद व्यासजी ने गणेशजी को महाभारत लिखने के लिए महाभारत की कहानी सुनाना शुरू किया।

    उस दिन भाद्र शुक्ल चतुर्थी थी। कहानी सुनाते समय वेद व्यासजी ने अपनी आंखें बंद कर लीं और लगातार 10 दिनों तक वे गणेशजी को कहानी सुनाते रहे और गणेशजी लिखते रहे।

    10वें दिन जब वेद ​​व्यासजी ने अपनी आंखें खोलीं, तो उन्होंने देखा कि एक जगह बैठकर लगातार लिखते रहने से गणेशजी के शरीर का तापमान काफी बढ़ गया था। ऐसे में वेद व्यासजी ने गणपति को ठंडा करने के लिए ठंडे पानी में डुबकी लगाई।

    वेद व्यासजी के कहने पर जहां गणपति महाभारत लिख रहे थे, वहां पास में ही अलकनंदा और सरस्वती नदियों का संगम था। जिस दिन वेद व्यासजी ने सरस्वती और अलकनंदा के संगम पर स्नान किया, उस दिन अनंत चतुर्दशी थी।

    यही वजह है कि चतुर्थी को गणेशजी की स्थापना करने के बाद अनंत चतुर्दशी को उनका विसर्जन किया जाता है। तांत्रिक ग्रंथों, मंत्र महार्णव और मंत्र महोदधि में कहा गया है कि गणेशजी को इच्छा के अनुसार स्थापित करना चाहिए और 10 दिन की साधना के बाद उनका विसर्जन करना चाहिए।