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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 05, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Chandra Grahan 2025: चंद्र ग्रहण के दिन भूलकर भी न करें ये काम, वरना बढ़ सकते हैं संकट

7 सितंबर 2025 को भाद्रपद पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा। सूतक काल और ग्रहण के दौरान शुभ कार्य, पूजा-पाठ, नुकीली वस्तुओं का प्रयोग, तामसिक...और पढ़ें

By ADITYA KUMAREdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Fri, 05 Sep 2025 05:37:07 AM (IST)Updated Date: Fri, 05 Sep 2025 05:37:07 AM (IST)
Chandra Grahan 2025: चंद्र ग्रहण के दिन भूलकर भी न करें ये काम, वरना बढ़ सकते हैं संकट
चंद्र ग्रहण के दिन भूलकर भी न करें ये काम

HighLights

  1. 7 सितंबर 2025 को भारत में दिखेगा साल का दूसरा चंद्र ग्रहण।
  2. सूतक काल में पूजा, तामसिक भोजन और नकारात्मक गतिविधियां वर्जित हैं।
  3. विवाद और नकारात्मक माहौल से दूरी रखने की सलाह दी गई है।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार 7 सितंबर 2025, रविवार को भाद्रपद पूर्णिमा है। इस दिन साल का दूसरा चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan 2025) लगने वाला है, जो भारत में दिखाई देगा। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार ग्रहण से ठीक तीन प्रहर पहले से सूतक काल शुरू हो जाता है, जिसमें कई नियमों का पालन जरूरी होता है।

ग्रहण के दौरान राहु का प्रभाव

ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि चंद्र ग्रहण के समय राहु का प्रभाव पृथ्वी पर अधिक हो जाता है। इस कारण नकारात्मक शक्तियां सक्रिय रहती हैं। यही वजह है कि इस अवधि में शुभ कार्य करने और अशुभ स्थलों पर जाने की मनाही की जाती है। नियमों की अनदेखी करने से प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।


नुकीली वस्तुएं और पूजा-पाठ से परहेज

ग्रहण काल में नुकीली वस्तुएं जैसे चाकू, नेल कटर, सेफ्टी पिन आदि पास रखने से बचना चाहिए। राहु के प्रभाव से नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है। साथ ही शास्त्रों के अनुसार इस समय देवी-देवताओं की प्रतिमा, तुलसी, पीपल और बरगद के पेड़ का स्पर्श भी वर्जित माना गया है।

नकारात्मक माहौल और विवाद से दूरी

चंद्र ग्रहण के दिन या उसके दौरान नकारात्मक जगहों पर जाना हानिकारक हो सकता है। ऐसा करने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है। इसी तरह, किसी से बहस या झगड़ा भी नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह परिवारिक और व्यक्तिगत जीवन में कलह बढ़ा सकता है।

भोजन और आचरण पर नियंत्रण

ग्रहण काल में तामसिक भोजन का सेवन वर्जित है। इसके अलावा ब्रह्मचर्य नियम का उल्लंघन भी अशुभ परिणाम देता है। ऐसा करने से व्यक्ति पर दैवीय कृपा कम हो जाती है और भविष्य में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। शांति, संयम और सकारात्मकता बनाए रखना सबसे शुभ माना गया है।

डिसक्लेमर: इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।