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Dev Diwali 2025: केवल 2 घंटे 35 मिनट के लिए होगा विशेष शुभ मुहूर्त, शिववास योग में करें आरती

देव दीपावली 2025 इस बार कार्तिक पूर्णिमा पर 5 नवंबर को मनाई जा रही है, जब काशी के गंगा तट लाखों दीपों से जगमगायेंगे। इस पवित्र दिन पर सिद्धि योग, शिवव...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Akash Sharma
Publish Date: Sun, 02 Nov 2025 06:56:32 PM (IST)Updated Date: Sun, 02 Nov 2025 06:56:32 PM (IST)
Dev Diwali 2025: केवल 2 घंटे 35 मिनट के लिए होगा  विशेष शुभ मुहूर्त, शिववास योग में करें आरती
देव दीपावली 5 नवंबर 2025 को मनाई जाएगी।

HighLights

  1. सिद्धि योग सुबह 11:28 बजे तक फलदायी माना गया।
  2. अश्विनी-भरणी नक्षत्र में आरोग्य और मानसिक शांति का संयोग।
  3. सूर्य तुला और चंद्र मेष स्थिति से दैवी प्रभाव बढ़ेगा।

धर्म डेस्क: इस वर्ष देव दीपावली का पर्व 5 नवंबर 2025, बुधवार को मनाया जाएगा और यह दिन भक्ति तथा दिव्यता के अनेक शुभ योगों से परिपूर्ण है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इस बार कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर सिद्धि योग, शिववास योग और अश्विनी-भरणी नक्षत्र का संयोग बन रहा है, जिससे यह पर्व अत्यंत मंगलमय साबित होगा। धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ-साथ ज्योतिषीय स्थितियाँ भी इस दिन को विशेष बनाती हैं, इसलिए भक्तों में उत्साह की लहर है।

देव दीपावली का विशेष शुभ मुहूर्त (Dev Deepawali ka Vishesh Muhurat)

वर्ष 2025 की देव दीपावली पर केवल 2 घंटे 35 मिनट का विशेष शुभ मुहूर्त रहेगा। यही वह अवधि मानी जा रही है जब दीपदान, पूजा-अर्चना और विशेष धार्मिक कर्म सर्वाधिक फलदायी होंगे। इसके अतिरिक्त सिद्धि योग सुबह 11:28 बजे तक प्रभावी रहेगा; शास्त्रों के अनुसार इस काल में आरंभ किए गए कार्यों में सफलता मिलने की प्रबल संभावना होती है। इस समय का समुचित प्रयोग करके भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति हेतु लक्ष्मी, विष्णु और शिव की उपासना कर सकते हैं।


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पूर्णिमा तिथि इस दिन शाम 6:48 बजे तक रहेगी। पूर्णिमा और नक्षत्रों के अनुकूल मेल-मिलाप से स्नान, जप, दान तथा ध्यान-पूजा के पुण्य को बढ़ाया जा सकता है। देव दीपावली के अवसर पर अश्विनी और भरणी नक्षत्र का संयोग बनना विशेष रूप से लाभप्रद माना जाता है। अश्विनी नक्षत्र स्वास्थ्य, नई शुरुआत और जीवनीशक्ति का संकेत देता है, जबकि भरणी नक्षत्र धैर्य, करुणा और रचनात्मकता से जुड़ा है। इन दोनों नक्षत्रों के साथ पूर्णिमा का जुड़ाव शारीरिक-मानसिक संतुलन के लिये अनुकूल है।

शिववास योग के समावेश का महत्व

ज्योतिषीय दृष्टि से सूर्यदेव तुला राशि में हैं और चंद्रदेव मेष राशि में स्थित हैं। इस संयोजन से ऊर्जा, संतुलन और उत्साह का सुंदर मेल बनता है, जिससे साधना और भक्ति के क्षण और भी अधिक फलदायी माने जाते हैं। विशेषकर शाम के समय जब गंगा के तट काशी में दीपों से जगमगाते हैं, तब आकाशीय ग्रह-स्थिति भी भक्तों के अनुभव को और दिव्य बना देती है।

शिववास योग का समावेश इस पर्व को और भी महत्वपूर्ण बनाता है। परंपरा के अनुसार शिववास योग में की गई आरती, जाप और मंत्र-साधना का फल दोगुना होता है। इसलिए योग्य मुहूर्त का ध्यान रखते हुए शाम या निर्धारित काल में आराधना करना हितकर रहेगा। साथ ही दान-धर्म, वृद्धों को भोजन तथा जरूरतमंदों की सहायता करने का परिणाम भी इस दिन विशेष माना जाता है।

यह भी पढ़ें- Dev Diwali 2025 Date: कब है देव दीपावली 2025? जानें कार्तिक पूर्णिमा की तिथि, पूजन और गंगा आरती का समय

संक्षेप में, 5 नवंबर 2025 की देव दीपावली न केवल दीपों का त्योहार है, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति, पुण्य संचय और मनोवैज्ञानिक शांति का अवसर भी है। केवल 2 घंटे 35 मिनट के शुभ मुहूर्त और कई अनुकूल योगों के चलते भक्तों को समयानुसार पूजा-विधान पूरा कर पुण्य प्राप्त करने का उत्तम अवसर मिल रहा है। भवतः/भवत्याः भक्ति और श्रद्धा के साथ यह पर्व अधिक मंगलमय हो।

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। नईदुनिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। नईदुनिया अंधविश्वास के खिलाफ है।