सर्वपितृ अमावस्या पर बना ज्ञात-अज्ञात पितरों के पूजन का महायोग, सूर्य और चंद्रमा दोनों हस्त नक्षत्र में होंगे साथ, गजछाया का सुखद संयोग भी
अहिल्या की नगरी में ज्ञात-अज्ञात पितरों के पूजन का महापर्व सर्वपितृ अमावस्या पर 10 अक्टूबर को अलग-अलग क्षेत्रों में एक दर्जन से अधिक सामूहिक तर्पण अनु...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 09 Oct 2026 09:57:00 AM (IST)Updated Date: Fri, 09 Oct 2026 09:57:00 AM (IST)
हंसदास मठ में तर्पण अनुष्ठान करते स्वजन। -नईदुनियाHighLights
- तर्पण, पिंडदान और दान पुण्य करने से मिलेगी पूर्वजों की विशेष कृपा
- तिथि क्षय से पंद्रह दिन के हुए श्राद्ध पक्ष की होगी विदाई
- सर्वपितृ अमावस्या पर एक दर्जन से स्थान पर सामूहिक आयोजन
रामकृष्ण मुले, नईदुनिया, इंदौर : अहिल्या की नगरी में ज्ञात-अज्ञात पितरों के पूजन का महापर्व सर्वपितृ अमावस्या पर 10 अक्टूबर को अलग-अलग क्षेत्रों में एक दर्जन से अधिक सामूहिक तर्पण अनुष्ठान होंगे। इस बार सूर्य और चंद्रमा दोनों के हस्त नक्षत्र में रहने से गज छाया योग से पितरों की विशेष कृपा के बने संयोग ने उल्लास कई गुणा बढ़ा दिया है।
शनिवार के दिन अमावस्या आने से सर्वपितृ-शनिश्चरी अमावस्या का संयोग भी बनेगा।ज्योतिर्विदों के अनुसार इस दिन श्राद्ध,तीर्थों पर स्नान, गो सेवा के साथ शनिदेव के पूजन का विशेष महत्व है।इसके साथ ही तिथि के क्षय के चलते 16 की बजाए 15 दिवसीय श्राद्ध पक्ष की विदाई भी होगी।
पिछले 81 वर्ष में शनिश्चरी और गजछाया के मेल का संयोग 12 बार बना है
अमावस्या की शुरुआत 9 अक्टूबर को रात 9.35 बजे से 10 अक्टूबर को रात 9.19 बजे तक रहेगी। श्राद्ध व तर्पण का श्रेष्ठ समय जिसे कुतुर्प मुहूर्त भी कहते है वह सुबह 11.45 से 12.31 बजे तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार पिछले 81 वर्ष में शनिश्चरी और गजछाया के मेल का संयोग 12 बार बना है। इस योग में तर्पण, पिंडदान और दान पुण्य करने से पितरों की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
इस योग में पितृ कर्म से लंबे समय तक पितरों की तृप्ति होती है
मध्यप्रदेश ज्योतिष एवं विद्वत परिषद के प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र शर्मा वैदिक ने बताया कि गज छाया का शाब्दिक अर्थ हाथी की छाया है। इसे पितृ कार्य की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। स्कंद पुराण के नागर खंड में इसका विस्तार से महत्व बताते हुए वर्णन है कि इस योग में पितृ कर्म से लंबे समय तक पितरों की तृप्ति होती है।
सर्वपितृ अमावस्या पर एक दर्जन से स्थान पर सामूहिक आयोजन
- 12 से अधिक स्थानों पर सर्वपितृ अमावस्या पर सामूहिक तर्पण अनुष्ठान होगा।
- 10 हजार से अधिक स्वजन भाग लेकर पूर्वजों के याद करेंगे।
- 100 से अधिक विद्वतजन संपन्न कराएंगे अनुष्ठान।
- 300 से अधिक सेवाभावी देंगे सेवाएं।
दो सत्रो में 1200 से अधिक स्वजन होंगे शामिल
33 वर्ष से तर्पण के सामूहिक अनुष्ठान कर रही संस्था श्रद्धा सुमन सेवा समिति के अध्यक्ष हरि अग्रवाल ने बताया कि सर्वपितृ अमावस्या पर तर्पण के लिए विशेष उत्साह है। साथ ही बन रहे विशेष संयोग के चलते तर्पण अनुष्ठान दो सत्रों में होगा। इसमें 1200 से अधिक लोग शामिल होकर अनुष्ठान में भाग लेंगे।
जाने आपके क्षेत्र में कहां होगा तर्पण का सामूहिक अनुष्ठान
- श्रमिक क्षेत्र में सामूहिक तर्पण अनुष्ठान गेंदेश्वर शिव मंदिर परदेशीपुरा चौराहा पर सुबह आठ बजे से तर्पण अनुष्ठान होगा।
- पश्चिम क्षेत्र में हरिधाम लोग मंगल न्यास का तर्पण अनुष्ठान कैट रोड स्थित हरिधाम पर सुबह 8 बजे से होगा।
- बड़ा गणपति क्षेत्र में श्रद्धा सुमन सेवा समिति द्वारा पिलियाखाल में तर्पण अनुष्ठान दो सत्रा में सुबह 8 बजे से होगा।
- विजय नगर क्षेत्र में सामूहिक तर्पण अनुष्ठान भारत माता मंदिर सुखलिया के समीप सुबह आठ बजे से होगा।
- राजवाड़ा क्षेत्र में विश्व ब्राह्मण समाज संघ द्वारा कृष्णापुरा छत्री पर तर्पण अनुष्ठान सुबह आठ बजे आयोजित किया जाएगा।
- फूठी कोठी क्षेत्र में संस्था कामधेनु सेवा समिति का सर्वपितृ आमावस्या पर तर्पण का आयोजन फूटी कोठी स्थित श्रीकृष्ण गोशाला परिसर में होगा।
- पंचकुइया क्षेत्र में रामगोपालदास महाराज के सान्निध्य में तर्पण राम मंदिर पंचकुइया में होगा।
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