Rashi Parichay: ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक सभी राशियों के जातकों की कुछ खास विशेषताएं होती हैं। ये विशेषताएं उनके ग्रह के स्वामी, लग्न में मौजूद ग्रह, उस पर पड़नेवाली दृष्टि, नक्षत्र और ग्रह के बल पर निर्भर करता है। यही वजह है कि एक ही राशियों के लाखों लोगों के स्वभाव में कुछ ना कुछ अंतर अवश्य पाया जाता है। लेकिन ज्योतिष शास्त्र का मानना है कि राशि विशेष के सहज गुण कुछ ना कुछ अंशोंतक व्यक्ति में जरुर होते हैं। तो चलिए आज हम आपको बतायें मेष राशि के जातकों के बारे में-
मेष राशि, राशि चक्र की पहली राशि है। इस राशि के स्वामी मंगल देव हैं। यह राशि पूर्व दिशा की द्योतक मानी जाती है। यानी इस राशि के जातकों को पूर्व दिशा में किये गये कार्यों में विशेष सफलता मिलेगी। मेष राशि के अन्तर्गत अश्विनी नक्षत्र के चारों चरण और कॄत्तिका का प्रथम चरण आता है। इस राशि के स्वामी ग्रह मंगल होने के नाते इन जातकों पर मंगल का प्रभाव होता है।
मंगल ग्रह को जीवन में पराक्रम और उत्साह का कारक माना जाता है। मेष राशि में जन्म लेने वाला जातक बहुत ही सुंदर, आकर्षक और कलात्मक होता है। शारीरिक बनावट में ये मध्यम कद के होते हैं। ये लोग स्वतंत्र विचार के होते हैं। उचित-अनुचित को लेकर इनका अपना दृष्टिकोण होता है। इनमें नेतृत्व की क्षमता होती है और खेल-कूूद, सेना, साहसिक कार्य आदि में सहज रुचि होती है।ये लोग अपना रास्ता स्वयं तय करते हैं और खतरों से घबराते नहीं हैं।
इस राशि के लोग आम तौर पर चतुर स्वभाव के और व्यवहारकुशल होते हैं। इनकी खासियत यह है कि ये बहुत जोशीले और जिद्दी स्वभाव वाले तथा अपमान बर्दाश्त नहीं करने वाले होते हैं। इस राशि के लोग अच्छे मित्र और प्रेमी होते हैं। एक बार किसी के हो जाते हैं, तो उसे अपना सब कुछ दे बैठते हैं। ये लोग कपड़े, फर्निचर और पुस्तकालय आदि कार्यों में भी खासी रुचि रखते हैं। मेष राशि के लोग हर काम को साफ-सुथरे ढंग से करना पसंद करते हैं।
इस राशि के जातक जिद्दी स्वभाव के होते हैं और आसानी से अपना स्टैंड नहीं छोड़ते। इस राशि के लोगों को गुस्सा बहुत जल्दी आता है, इस वजह से इनका किसी ना किसी से विवाद चलता रहता है। ये लोग तब तक अपनी गलती नहीं मानते, इसलिए दांपत्य जीवन में परेशानी आती है। इन जातकों की आंखें कमजोर रहती हैं। इस राशि का प्रभाव मस्तिष्क पर रहने की वजह से इन लोगों को मानसिक शांति कम रहती है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मेष राशि के जातकों का भाग्योदय उनके जीवन के 16वें वर्ष में, 22वें वर्ष, 28वें वर्ष, 32वें वर्ष और 36 वर्ष की आयु में होता है। इन वर्षों के दौरान इनके हर कार्य सफल होते हैं. इनकी आर्थिक स्थिति बेहतर होती है। इनका स्वभाव मेहनती और जिद्दी होता है, इसलिए जीवन के लक्ष्य को अपनी मेहनत से हासिल कर लेते हैं।
इस राशि के जातकों को हनुमानजी की सदैव पूजा करनी चाहिए। इनके लिए सूर्य और गुरु योगकारक होते हैं। इन ग्रहों को मजबूती प्रदान करने के लिए इनसे जुड़े रत्न और उपाय कर सकते हैं। ज्यादा गुस्सा आता हो, तो जीवन भर मूंगा धारण करें।
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