
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन : महालय श्राद्ध पक्ष में सोमवार को तिथि, वार और नक्षत्र का ऐसा संयोग बन रहा है, जिसे पितृकर्म और पुण्य कार्यों की दृष्टि से विशेष माना जा रहा है। इस दिन दशमी तिथि के साथ पुष्य नक्षत्र का संयोग रहेगा। धार्मिक मान्यता में सोमवार मन की शांति का कारक माना गया है, दशमी तिथि पितृऋण से उऋण होने के भाव से जुड़ी है और पुष्य नक्षत्र श्राद्धकर्ता को वैभव प्रदान करने वाला माना गया है। ऐसे में महालय में इन तीनों का संयोग विशेष धार्मिक महत्व वाला बन गया है।
श्री क्षेत्र पंडा समिति के अध्यक्ष पं.राजेश त्रिवेदी ने बताया गरुड़ पुराण की मान्यता के अनुसार पुष्य नक्षत्र में किया गया श्राद्ध अतुलनीय वैभव प्रदान करने वाला माना गया है। यही कारण है कि पितृपक्ष में पुष्य नक्षत्र का संयोग मिलने पर पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध के साथ दान-पुण्य को भी विशेष फलदायी माना जाता है।
सोमवार भगवान शिव और चंद्रमा से जुड़ा होने के कारण मन की शांति और मानसिक स्थिरता का प्रतीक माना जाता है। वहीं दशमी तिथि धर्म और पितृकर्म के संकल्प को दृढ़ता देने वाली मानी गई है। इस तरह सोमवार मन को शांति, दशमी पितृऋण से मुक्ति का भाव और पुष्य नक्षत्र परिवार के लिए सुख-समृद्धि तथा वैभव की कामना का अवसर प्रदान करता है।
धर्मशास्त्र के अनुसार पुष्य नक्षत्र में किया गया दान, पुण्य, धर्म-कर्म और पितरों के निमित्त किया गया तर्पण विशेष शुभ फल देने वाला माना गया है। इसलिए इस दिन श्राद्ध के साथ अन्न, वस्त्र और सामर्थ्य के अनुसार दान करने की परंपरा है। महालय में इस बार बना यह संयोग श्रद्धालुओं के लिए पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के साथ उनके आशीर्वाद की कामना का विशेष अवसर बन रहा है।
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