
धर्म डेस्क। भाद्रपद पूर्णिमा से चल रहे पितृ पक्ष (महालय श्राद्ध) के दौरान आने वाली आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को इंदिरा एकादशी (Indira Ekadashi) के नाम से जाना जाता है। इस साल इंदिरा एकादशी का पावन व्रत 6 अक्टूबर 2026, मंगलवार को रखा जाएगा।
सनातन परंपरा में इस व्रत का विशेष आध्यात्मिक महत्व है क्योंकि यह व्रत स्वयं के कल्याण के साथ-साथ पूर्वजों (पितरों) को यमलोक के कष्टों से मुक्ति दिलाकर मोक्ष प्रदान करने वाला माना गया है। इस बार इंदिरा एकादशी पर 4 अत्यंत शुभ योगों का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिससे इस दिन पूजा-अर्चना का फल कई गुना बढ़ जाएगा।
इस साल इंदिरा एकादशी के दिन चार अत्यंत मंगलकारी योग बन रहे हैं:
ब्रह्म मुहूर्त (स्नान व संकल्प): सुबह 04:39 बजे से 05:28 बजे तक। इस समय स्नान के बाद व्रत एवं श्रीहरि पूजन का संकल्प लें।
इंदिरा एकादशी के दिन उन पितरों का श्राद्ध, तर्पण व पिंडदान किया जाता है, जिनका निधन किसी भी माह की एकादशी तिथि को हुआ हो।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सतयुग में माहिष्मति नगरी के राजा इंद्रसेन एक धर्मनिष्ठ राजा थे। एक दिन महर्षि नारद ने आकर राजा को बताया कि उनके पिता पूर्व जन्म में एकादशी व्रत भंग होने के कारण यमलोक में यातनाएं भोग रहे हैं और उन्होंने अपने पुत्र से इंदिरा एकादशी का व्रत करने की प्रार्थना भेजी है।
नारद जी के मार्गदर्शन में राजा इंद्रसेन ने आश्विन कृष्ण एकादशी को विधि-विधान से व्रत रखकर उसका संपूर्ण पुण्य अपने पिता को समर्पित कर दिया। इस व्रत के प्रभाव से उनके पिता के सभी पाप नष्ट हो गए और उन्हें यमलोक से मुक्ति मिलकर भगवान विष्णु के परम धाम (वैकुंठ) में स्थान प्राप्त हुआ। राजा इंद्रसेन को भी अंत समय में स्वर्ग लोक की प्राप्ति हुई।
(नोट: यह विवरण धार्मिक पंचांग, ज्योतिषाचार्यों की गणनाओं और पौराणिक मान्यताओं पर आधारित है।)
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