
रामकृष्ण मुले, इंदौर। पितरों के पूजन का पर्व श्राद्ध पक्ष इस बार 15 दिनों का होगा, लेकिन इसमें परंपरा के अनुसार सोलह श्राद्ध संपन्न होंगे। अष्टमी तिथि के क्षय के कारण इस वर्ष श्राद्ध पक्ष का एक दिन कम हुआ है। इसके चलते 30 सितंबर को चतुर्थी और पंचमी दोनों तिथियों का श्राद्ध एक ही दिन किया जाएगा।
इस दौरान कई संयोग भी बनेंगे। सर्वपितृ अमावस्या पर 10 अक्टूबर को शनिवार को होने से शनैच्चरी अमावस्या का संयोग भी बन रहा है।इस अवसर पर शहरभर में एक दर्जन से अधिक धार्मिक और समाजिक संस्थाएं निश्शुल्क सामूहिक तर्पण के आयोजन करेंगी।
आचार्य रामचंद्र शर्मा वैदिक के अनुसार भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से आश्विन कृष्ण अमावस्या तक की अवधि को सोलह श्राद्ध कहा जाता है। पंचांग के अनुसार 26 सितंबर को पूर्णिमा, 27 को प्रतिपदा, 28 को द्वितीया और 29 सितंबर को तृतीया का श्राद्ध होगा।
30 सितंबर को चतुर्थी और पंचमी दोनों का श्राद्ध किया जाएगा। चतुर्थी तिथि दोपहर 2.56 बजे तक रहेगी, इसके बाद पंचमी शुरू होगी, जो अगले दिन दोपहर 12.36 बजे तक रहेगी।
पंचमी तिथि एक अक्टूबर को अपराह्न काल को स्पर्श नहीं कर रही है, इसलिए उसका श्राद्ध 30 सितंबर को ही होगा। इसके बाद 1 अक्टूबर को षष्ठी, 2 को सप्तमी और 3 अक्टूबर को अष्टमी व जीवित्पुत्रिका श्राद्ध होगा।
4 अक्टूबर को नवमी अर्थात सौभाग्यवती महिलाओं का श्राद्ध, 5 को दशमी, 6 को एकादशी तथा 7 अक्टूबर को द्वादशी पर संन्यासियों का श्राद्ध होगा। 8 को त्रयोदशी और 9 अक्टूबर को चतुर्दशी (शस्त्र से मृत व्यक्तियों का श्राद्ध) होगा। 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ श्राद्ध पक्ष का समापन होगा।
ज्योतिर्विद् विनायक चतुर्वेदी के अनुसार शास्त्रों में श्राद्ध कर्म के लिए अपराह्न काल को विशेष महत्व दिया गया है। मान्यता है कि इस अवधि में पितृ अपने परिजनों के बीच उपस्थित रहते हैं। तर्पण, श्राद्ध, दान-पुण्य तथा ब्राह्मण भोजन के माध्यम से उन्हें श्रद्धापूर्वक स्मरण किया जाता है। सर्वपितृ अमावस्या पर ज्ञात-अज्ञात सभी पितरों के निमित्त श्राद्ध और तर्पण करने की परंपरा है। श्राद्ध पक्ष केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उनकी स्मृतियों को परिवार की नई पीढ़ी तक पहुंचाने का अवसर भी है।
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इस अवसर पर 10 अक्टूंबर को सर्वपितृ अमावस्या रहेगी। इस दिन जहां गजछाया योग रहेगा वहीं शनिवार को अमावस्या के आने से सर्वपितृ शनैश्चरी अमावस्या का संयोग भी बनेगा। इस दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों हस्त नक्षत्र में संचार करेंगे। ज्योतिर्विद डॉ. पं. सोमेश्वर जोशी ने बताया कि इसबार सोलह श्राद्ध की शुरुआत शनिवार से होगी और समापन भी शनिवार को होगी। पंचांगों के अनुसार इस दौरान पितृ तर्पण, श्राद्ध, दान-पुण्य और तीर्थ स्नान का विशेष महत्व माना गया है।
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