आखिर क्यों पूजा पाठ या शुभ कार्यों में सिर्फ दाहिने हाथ का होता है इस्तेमाल
शास्त्रों के अनुसार यह गलत है। अपने हाथों से दान और परोपकारी कार्य करते समय केवल दाहिने हाथ का उपयोग करना चाहिए। ...और पढ़ें
By Navodit SaktawatEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Tue, 28 Mar 2023 03:48:35 PM (IST)Updated Date: Tue, 28 Mar 2023 04:21:41 PM (IST)

सनातन धर्म में किसी भी धार्मिक एवं मांगलिक कार्य में दाहिने हाथ का ही इस्तेमाल किया जाता है। हम अक्सर देखते हैं कि पंडित-पुरोहितों द्वारा हवन, पूजन एवं यज्ञ में दाहिने हाथ का उपयोग करने के लिए कहा जाता है। यहां तक की भगवान का प्रसाद हमेशा दाहिने हाथ से लेना चाहिए। किसी को दान करते समय केवल दाहिने हाथ का प्रयोग करना चाहिए। आरती करते समय दाहिने हाथ को भी आगे लाया जाता है। बड़ों के अनुसार हम इस बात का ध्यान रखते हैं, लेकिन हम में से बहुत कम लोग जानते हैं कि इसके पीछे क्या मान्यता है।
इस वजह से होता है दाहिने हाथ का इस्तेमाल
हम में से कई लोग ऐसे हैं जो इस पर ध्यान दिए बिना इसे अंधविश्वास मानते हैं और जो हाथ सबसे पहले आता है वह पूजा या प्रसाद लेते समय इस्तेमाल करते हैं। इसके पीछे मान्यता है कि व्यक्ति का दाहिना हाथ सकारात्मक ऊर्जा से भरा होता है। भगवान का आशीर्वाद लेते समय, भगवान नारायण जी को बलिदान करते समय, किसी को भिक्षा देते समय सकारात्मक कार्य करना चाहिए। दान के लिए भी दाहिने हाथ के उपयोग की आवश्यकता होती है।
कई बार लोग सोचते हैं कि वे अपने दाहिने हाथ का इस्तेमाल भगवान की पूजा या काम में करते हैं। कुछ दान करते समय वे अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी हाथ का उपयोग करते हैं।
शास्त्रों के अनुसार यह गलत है। अपने हाथों से दान और परोपकारी कार्य करते समय केवल दाहिने हाथ का उपयोग करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि दाहिने हाथ से दान करने से देवता प्रसन्न होते हैं। जब बाएं हाथ के दान से देवताओं का अपमान होता है। इसलिए दाहिने हाथ का प्रयोग भगवान का प्रसाद लेते समय, जल चढ़ाएं, पूजा सामग्री चढ़ाएं, आरती करें, भिक्षा दें, पूजा से संबंधित कोई भी कार्य करें।
डिसक्लेमर
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