
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। वर्ष 2028 में सिंहस्थ महापर्व से पहले धर्मधानी उज्जैन में इसी साल 17 मई से 15 जून तक अधिकमास के रूप में आस्था का महाकुंभ लगेगा। देशभर से श्रद्धालु चौरासी महादेव, सप्त सागर तथा नौ नारायण की यात्रा करने उज्जैन आएंगे। साल 2026 में अधिक मास का संयोग 32 महीने 16 दिन तथा चार घड़ी बाद बन रहा है। शासन प्रशासन को सिंहस्थ की तरह तीर्थों पर श्रद्धालुओं की सुविधा के विशेष इंतजाम करना होंगे।
ज्योतिषाचार्य पं. अमर डब्बावाला ने बताया पंचांग की गणना के अनुसार इस बार 17 मई को पुरुषोत्तम मास अधिक मास का आरंभ होगा। यह समय भारतीय कैलेंडर की गणना से प्रथम अधिक ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष के रूप में सामने आएगा। अधिक मास को पुरुषोत्तम मास की संज्ञा दी गई है। इस माह के अंतर्गत तीर्थाटन धार्मिक अनुष्ठान धार्मिक सत्संग धार्मिक यात्रा कल्पवास आदि अनुक्रम साधे जाते हैं।
धर्म शास्त्रीय एवं पौराणिक मान्यताओं के अनुसार देखें तो इस माह में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के लिए धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। उज्जैन में इसका विशेष महत्व है। देशभर से श्रद्धालु यहां चौरासी महादेव, नौ नारायण तथा सप्त सागर के दर्शन व पूजन करने आते हैं। उक्त सभी स्थानों पर दान की अलग-अलग महिमा बताई गई है। इसमें दान की वस्तुएं भी अलग हैं।
भारतीय ज्योतिष शास्त्र में काल गणना का अपना पक्ष है। इसमें तिथि की घट बढ़ को संतुलित कर अधिक मास का निर्माण किया जाता है। प्रत्येक 32 माह के बाद इसका संयोग बनता है। वर्ष 2023 में श्रावण अधिक मास का संयोग बना था। इस वर्ष 17 मई से 15 जून तक ज्येष्ठ अधिक मास रहेगा। वर्ष 2026 से पहले ज्येष्ठ अधिक मास का संयोग वर्ष 1988, 1999, 2007 तथा 2018 में भी बन चुका है।
अधिक मास को मल मास कहा जाता है इस एक माह में विवाह आदि मांगलिक कार्य नहीं होंगे। हिन्दू धर्मावलंबी केवल तीर्थाटन, भगवत पारायण, दान,धर्म, देव दर्शन करेंगे। इस एक माह कल्पवास का भी विशेष महत्व है। श्रद्धालु उज्जैन सहित अन्य धार्मिक नगरियों में निवास कर धर्म अनुष्ठान संपादित करेंगे। सोमवती अमावस्या के महासंयोग में समापन।
सालों बाद आए रहे ज्येष्ठ अधिक मास का समापन 15 जून को सोमवती अमावस्या के दिन होगा। इस दिन शिप्रा व सोमकुंड में पर्व स्नान होगा। देशभर से हजारों भक्त तीर्थ स्नान करने उज्जैन आएंगे। वर्तमान में सोमकुंड स्थित उज्जैन के सप्त सागरों की स्थिति खराब है। शासन, प्रशासन को अभी से चौरासी महादेव, सप्त सागर तथा नौ नारायण मंदिरों में श्रद्धालुओं की सुविधा के इंतजाम करना चाहिए।