1 पैर पर 3 साल की कठोर तपस्या, फिर प्रकट हुआ अनोखा धाम, जानें बीकानेर के इस काली माता मंदिर की अनोखी कहानी
राजस्थान के बीकानेर स्थित सुजानदेसर का काली माता मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। करीब 25 साल पहले एक संत द्वारा एक पैर पर खड़े होकर की...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 13 Oct 2026 07:12:40 PM (IST)Updated Date: Tue, 13 Oct 2026 07:12:40 PM (IST)
11 फीट 3 इंच ऊंची 5 धातुओं से बनी मां काली की प्रतिमा। (सोशल मीडिया)HighLights
- 11 फीट 3 इंच ऊंची 5 धातुओं से बनी मां काली की प्रतिमा
- एक पैर पर 3 साल की तपस्या के बाद स्थापित हुआ मंदिर
- एक ही स्थान पर नवदुर्गा व अन्य देवी-देवताओं के दर्शन
धर्म डेस्क। शारदीय नवरात्रि के पावण अवसर पर रेगिस्तानी क्षेत्र बीकानेर के सुजानदेसर स्थित काली माता मंदिर में भक्ति और आस्था का अनुपम दृश्य देखने को मिल रहा है। बीकानेर का यह प्रसिद्ध मंदिर लगभग 25 साल पुराना है और श्रद्धालुओं के बीच एक ही स्थान पर मां दुर्गा के नौ रूपों के अलौकिक दर्शन के लिए जाना जाता है।
यहां स्थापित मां काली की 11 फीट 3 इंच ऊंची विशाल प्रतिमा श्रद्धालुओं के मुख्य आकर्षण का केंद्र है, जहां दर्शन के लिए बीकानेर के अलावा कोलकाता, मुंबई और राजस्थान के कई शहरों से हजारों भक्त पहुँचते हैं।
1 पैर पर 3 साल की कठोर तपस्या से जुड़ी मंदिर की स्थापना
मंदिर के पुजारी राधेश्याम के अनुसार, इस सिद्ध धाम की स्थापना के पीछे एक अलौकिक पौराणिक कथा जुड़ी हुई है। लगभग 25 साल पूर्व हरियाणा से आए एक साधु (बाबा) ने इस निर्जन स्थान पर लगातार तीन सालों तक एक पैर पर खड़े होकर मां भगवती की कठोर तपस्या की थी।
बाबा की निश्छल भक्ति से प्रसन्न होकर देवी मां ने उन्हें प्रत्यक्ष दर्शन दिए और उसी स्थान पर अपना धाम स्थापित करने का निर्देश दिया। इसके बाद बाबा ने यहां मंदिर की नींव रखी, जो आज बीकानेर और आसपास के राज्यों के लिए मुख्य धार्मिक केंद्र बन चुका है।
11 फीट 3 इंच ऊंची और पंचधातु से निर्मित विशाल प्रतिमा
गर्भगृह में स्थापित मां काली की 11 फीट 3 इंच ऊंची प्रतिमा भव्यता और दिव्य ऊर्जा का अहसास कराती है। इस विशाल प्रतिमा को सिद्ध कारीगरों द्वारा पंचधातु (5 धातुओं) के योग से ढालने में लगभग डेढ़ साल का समय लगा था।
एक ही परिसर में विराजित हैं नवदुर्गा के सम्पूर्ण स्वरूप
सुजानदेसर स्थित इस काली धाम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां श्रद्धालुओं को एक ही परिक्रमा में मां दुर्गा के नौ दिव्य स्वरूपों के दर्शन प्राप्त होते हैं-
- सर्वप्रथम सिद्धिदाता भगवान गणेश के दर्शन के बाद मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, महागौरी, सिद्धिदात्री के साथ-साथ मां सती और मां सरस्वती की प्रतिमाएं स्थापित हैं।
- परिसर में हनुमान जी, सीता-राम, लक्ष्मण जी, भगवान महादेव, राधा-कृष्ण तथा विशाल काला और गौरा भैरव की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं।
नवरात्रि में भरता है विशाल मेला; रात 12 बजे तक खुले रहते हैं पट
- दर्शन का समय: मां के दरबार के कपाट प्रातः 04:15 बजे ब्रह्म मुहूर्त में खुलते हैं और रात 12:00 बजे तक अनवरत दर्शन के लिए खुले रहते हैं।
- विशेष मेला: नवरात्रि के पूरे नौ दिनों तक यहां विशाल धार्मिक मेले का आयोजन होता है, जहां श्रद्धालु मां काली के दर्शन कर सुख, समृद्धि और आरोग्य का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
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