
Chhath Puja 2026 Katha and History: बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश से शुरू हुई छठ पूजा आज देश के कई हिस्सों में मनाई जाती है। चार दिनों तक चलने वाले इस महापर्व में सूर्य देव के साथ छठी मैया की पूजा होती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि छठी मैया कौन हैं और इस पूजा की शुरुआत कैसे हुई? इसे लेकर कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। इनका संबंध राजा प्रियव्रत, महाभारत के कर्ण और द्रौपदी के साथ-साथ माता सीता से भी जोड़ा जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, छठी मैया को षष्ठी देवी कहा जाता है। उन्हें बच्चों की रक्षा करने वाली और संतान सुख का आशीर्वाद देने वाली देवी माना जाता है।
एक प्रचलित कथा राजा प्रियव्रत और उनकी पत्नी रानी मालिनी से जुड़ी है। कहा जाता है कि राजा के पास सब कुछ था, लेकिन उन्हें संतान सुख नहीं मिला था। संतान प्राप्ति के लिए उन्होंने यज्ञ कराया। इसके बाद रानी ने एक पुत्र को जन्म दिया, लेकिन वह मृत पैदा हुआ।
राजा और रानी दुखी होकर विलाप करने लगे। तभी वहां एक देवी प्रकट हुईं। उन्होंने अपना परिचय देवसेना के रूप में दिया और बताया कि वह प्रकृति के छठे अंश से उत्पन्न हुई हैं, इसलिए उन्हें षष्ठी कहा जाता है। मान्यता है कि देवी की पूजा के बाद राजा को संतान सुख मिला। तभी से षष्ठी देवी की पूजा की परंपरा शुरू हुई।
छठ पूजा का संबंध महाभारत से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि सूर्य पुत्र कर्ण भगवान सूर्य के परम भक्त थे। वह रोज नदी में खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य देते और जरूरतमंदों को दान करते थे। इसी वजह से कई लोककथाओं में कर्ण को सूर्य उपासना की परंपरा से जोड़ा जाता है।
एक दूसरी लोककथा के अनुसार, वनवास के दौरान द्रौपदी ने सूर्य देव की आराधना की थी। मान्यता है कि उनकी पूजा से पांडवों की मुश्किलें दूर हुईं और उन्हें अक्षय पात्र मिला। हालांकि, द्रौपदी द्वारा आज के स्वरूप में छठ व्रत करने का स्पष्ट ऐतिहासिक प्रमाण नहीं मिलता।
छठ पूजा का संबंध रामायण से भी जोड़ा जाता है। लोकमान्यता है कि वनवास से लौटने के बाद भगवान राम और माता सीता ने कार्तिक शुक्ल षष्ठी को सूर्य देव की पूजा की थी। अगले दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देकर पूजा पूरी की गई।
बिहार के मुंगेर में भी मान्यता है कि माता सीता ने वहां छठ व्रत किया था। हालांकि, यह प्रसंग क्षेत्रीय लोकविश्वास का हिस्सा है।
छठ पूजा की शुरुआत कब और किसने की, इसका कोई एक प्रमाणित ऐतिहासिक जवाब नहीं है। माना जाता है कि इसकी जड़ें बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश की पुरानी लोकपरंपराओं में हैं। प्राचीन समय से ही लोग सूर्य को जीवन और ऊर्जा का स्रोत मानकर उनकी पूजा करते आए हैं।
समय के साथ रोजगार के लिए इन क्षेत्रों से लोग देश के अलग-अलग शहरों में पहुंचे और अपने साथ छठ की परंपरा भी ले गए। आज दिल्ली, मुंबई से लेकर विदेशों तक छठ मनाया जाता है। यही वजह है कि यह पर्व अब सिर्फ एक क्षेत्र की पहचान नहीं, बल्कि आस्था और परिवार को जोड़ने वाला महापर्व बन चुका है।
छठ पूजा 2026 की तारीखें: 13 नवंबर को नहाय-खाय, 14 नवंबर को खरना, 15 नवंबर को संध्या अर्घ्य और 16 नवंबर को उषा अर्घ्य दिया जाएगा।
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