
धर्म डेस्क। दशहरा यानी विजयादशमी बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान राम ने रावण का वध किया था। यह पर्व लोगों को सच्चाई के रास्ते पर चलने और बुराई से दूर रहने का संदेश देता है। इसी परंपरा के साथ छत्तीसगढ़ में दशहरा 2026 उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। प्रदेश के अलग-अलग शहरों में रावण दहन के आयोजन हुए। लोगों ने परिवार और दोस्तों के साथ उत्सव में हिस्सा लिया।

राजधानी रायपुर के रावणभाठा मैदान में रावण के पुतले का दहन किया गया। वहीं, डब्ल्यूआरएस कॉलोनी के मैदान में भी विजयादशमी पर रावण दहन हुआ। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग उत्सव देखने पहुंचे।


दुर्ग में मुख्य दशहरा आयोजन पंडित रविशंकर शुक्ल स्टेडियम में किया गया। भिलाई के सेक्टर-2 में भी रावण दहन का आयोजन हुआ। अलग-अलग जगहों पर लोगों ने बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक इस पर्व को उत्साह के साथ मनाया।

भिलाई-3 की बिजली नगर कॉलोनी में सार्वजनिक दशहरा उत्सव समिति की ओर से रावण दहन से पहले रामलीला का आयोजन किया गया। इसमें कलाकारों ने रामायण के प्रसंगों का मंचन किया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
भिलाई-3 के मिनी स्टेडियम में आयोजित सार्वजनिक दशहरा उत्सव में भी कलाकारों ने रामलीला का मंचन किया। इस दौरान लोगों ने भगवान राम की लीला देखी और उत्सव में हिस्सा लिया।

छत्तीसगढ़ में दशहरा सिर्फ रावण दहन तक सीमित नहीं है। बस्तर में दशहरा अपनी अनूठी परंपराओं और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए जाना जाता है। मावली परघाव के दौरान आसमान में आतिशबाजी की रोशनी, मां दंतेश्वरी का छत्र और मावली माता की डोली ने खास माहौल बनाया। इस अलौकिक पल को मोबाइल में कैद करने के लिए बड़ी संख्या में लोगों ने अपने फोन उठाए।
इस तरह छत्तीसगढ़ में दशहरा धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपराओं और उत्सव के रंगों के साथ मनाया गया। अलग-अलग शहरों में हुए आयोजनों ने पर्व की रौनक बढ़ाई।
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