
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। इस बार दीपोत्सव पर तिथियों का अनूठा संयोग बन रहा है। कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी से भाई दूज तक मनाए जाने वाले पांच दिवसीय दीप पर्व में इस बार रूप चतुर्दशी और दीपावली एक ही दिन 8 नवंबर को मनाई जाएगी।
सुबह ब्रह्म मुहूर्त में रूप चतुर्दशी का पर्व रहेगा, तो शाम को अमावस्या के प्रदोषकाल में घर-घर दीपमालाएं सजेंगी और सुख-समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी महालक्ष्मी का पूजन होगा। इससे दो दिन पहले 6 नवंबर को धनतेरस मनाई जाएगी।
ज्योतिषाचार्य पं.अमर डब्बावाला ने बताया पंचांगीय गणना के अनुसार 6 नवंबर शुक्रवार को धनतेरस रहेगी। धन त्रयोदशी का संबंध प्रदोषकाल से होने के कारण इस दिन शाम को पूजन और स्वर्ण, रजत, बर्तन सहित अन्य शुभ वस्तुओं की खरीदी का विशेष महत्व रहेगा।
त्रयोदशी तिथि 7 नवंबर को सुबह 10 बजकर 50 मिनट तक रहेगी। इसके बाद चतुर्दशी आरंभ होगी, जो 8 नवंबर को सुबह 11 बजकर 30 मिनट तक रहेगी। इसके बाद अमावस्या तिथि लग जाएगी। इस कारण 8 नवंबर की सुबह रूप चतुर्दशी तथा शाम को दीपावली मनाने का संयोग बन रहा है।
धर्मशास्त्रीय मान्यता के अनुसार नरक चतुर्दशी अर्थात रूप चौदस प्रातःकालीन पर्व है। इस दिन सूर्योदय से पहले अभ्यंग स्नान तथा पितरों के निमित्त दीपदान का विधान है। इसलिए 8 नवंबर को ब्रह्म मुहूर्त में रूप चतुर्दशी मनाई जाएगी। इसी दिन अमावस्या तिथि प्रदोषकाल में विद्यमान रहने से शाम को महालक्ष्मी पूजन होगा। घर-आंगन दीपों से जगमगाएंगे और श्रद्धालु धन, धान्य एवं सुख-समृद्धि की कामना से माता लक्ष्मी की आराधना करेंगे।
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सर्दी के मौसम में सूर्योदय से पहले तिल्ली के तेल की मालिश के बाद केसर, हल्दी, चंदन, बेसन आदि का उबटन लगाकर गुनगुने जल से स्नान करने को अभ्यंग स्नान कहते हैं। आयुर्वेद में अभ्यंग स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। शरद ऋतु में अभ्यंग स्नान पुष्टिवर्धक माना गया है। इससे व्यक्ति वर्षभर स्वस्थ रहता है और मुखमंडल व त्वचा पर कांति बनी रहती है। इसलिए नर्कहरा चतुर्दशी पर भगवान महाकाल अभ्यंग स्नान कर आमजन को स्वस्थ रहने का संदेश देते हैं।
