मल्टीमीडिया डेस्क। दीप पर्व दिपावली पूरे देश खासकर उत्तर भारत में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन घर स्वादिष्ठ पकवानों की महक से महकता रहता है और सुगंधित फूलों से घर को सजाया जाता है। इस दिन मां लक्ष्मी और गणेशजी की पूजा की जाती है। इस दिन लक्ष्मी-गणेश की पूजा कर आने वाले साल के लिए सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।

दिपावली के दिन शंख ध्वनि करने का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस दिन घर में शंख को बजाने से वातावरण शुद्ध होता है और घर- परिवार में शांति के साथ समृद्धि आती है। शास्त्रोक्त मान्यता के अनुसार लक्ष्मी पूजा के अवसर पर घर में शंख तथा घंटी को बजाना शुभ होता है। ऐसा करने से घर के वातावरण में मौजूद सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा बाहर निकल जाती है और परिवार में महालक्ष्मी के स्वागत के लिए सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। शंख और घंटी की ध्वनि परिवार में सुख, शांति और समृद्धि लाने के साथ संपूर्ण वातावरण को स्वच्छ करती है।

शंख को बताया है महालक्ष्मी का भाई

धर्मशास्त्रों में शंख की पूजा समृद्धि, दीर्घायु, प्रसिद्धि और के लिए पापों का नाश करने के लिए की जाती है। देवी लक्ष्मी को शंख अतिप्रिय है। विष्णु पुराण के अनुसार शंख को महालक्ष्मी का भाई माना गया है। वैज्ञानिक मान्यता के अनुसार शंख को बजाने से दिल की मांसपेशियां मजबूत होती है, स्मरण शक्ति बढ़ती है, वाणी दोष भी समाप्त हो जाता है और सांस के रोगों से छुटकारा मिलता है। शंख की ध्वनि को भी अति शुभ माना गया है। इसकी आवाज से मन-मस्तिष्क में सकारात्मक विचारों का संचार होता है और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है।

तीन प्रकार के होते हैं शंख

शास्त्रों के अनुसार शंख तीन प्रकार के बताए गए हैं। वामावर्ती, दक्षिणावर्ती और मध्यवर्ती। वामावर्ती शंख माता लक्ष्मी का और दक्षिणावर्ती शंख भगवान विष्णु का प्रतीक माना गया है। दक्षिणावर्ती शंख की घरों में विशेष रूप से पूजा की जाती है। मान्यता है कि दक्षिणावर्ती शंख के घर में रखने और उसकी रोजाना पूजा करने से घर में विपुल धन आता है। शंख की स्थापना विशेष अवसरों जैसे दिपावली, धनतेरस, पुष्य नक्षत्र, दशहरा, अक्षय तृतीया पर करना ज्यादा शुभ होता है।

Posted By: Yogendra Sharma