
रामकृष्ण मुले, इंदौर। इस वर्ष दीपोत्सव पांच नहीं, बल्कि छह दिनों में समाया है। धनतेरस से भाई दूज तक मनाए जाने वाले पंच पर्व में तिथियों की विशेष स्थिति के कारण उदया और प्रदोषकाल की महत्ता के अनुरूप अलग-अलग दिन मनाए जाएंगे। शास्त्रोक्त मान्यता के अनुसार धनतेरस और दीपावली का पर्व प्रदोष काल में आने वाली तिथि के आधार पर मनाया जाएगा।
पंच पर्व में इस बार एक ही दिन में सुबह रूप चतुर्दशी पर रूप सौंदर्य निखरेगा और शाम को सुख समृद्धि के लिए महालक्ष्मी पूजन किया जाएगा। दीपावली के अगले दिन सोमवती अमावस्या का संयोग बनेगा जबकि जबकि गोवर्धन पूजन और भाई-बहन के स्नेह का पर्व भाईदूज एक-एक दिन आगे बढ़ेगा।
मध्यप्रदेश ज्योतिष एवं विद्वत परिषद के अध्यक्ष आचार्य पंडित रामचंद्र शर्मा वैदिक के अनुसार दीपावली जैसे प्रमुख त्योहारों में तिथि के साथ प्रदोष काल का विशेष महत्व होता है। इसी आधार पर इस वर्ष भी धनतेरस और दीपावली के पूजन का समय निर्धारित किया गया है। 6 नवंबर शुक्रवार को धनतेरस मनाई जाएगी।
इस दिन द्वादशी तिथि सुबह 10.31 बजे तक रहेगी। इसके बाद त्रयोदशी तिथि प्रारंभ होगी, जो अगले दिन शनिवार सुबह 10:48 बजे तक रहेगी। धनतेरस का पर्व प्रदोष काल में मनाने की परंपरा के अनुसार शुक्रवार को ही धनतेरस, यम दीपदान और प्रदोष व्रत किया जाएगा। इस दिन हस्त नक्षत्र का भी संयोग रहेगा।
7 नवंबर शनिवार को मास शिवरात्रि के साथ काली चौदस मनाई जाएगी। इसके अगले दिन 8 नवंबर रविवार को सुबह रूप चौदस यानी नरक चतुर्दशी का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन चतुर्दशी तिथि सुबह 11:28 बजे तक रहेगी। इसके बाद अमावस्या तिथि प्रारंभ होगी, जो 9 नवंबर सोमवार को सुबह 12:32 बजे तक रहेगी।
पंच पर्व का मुख्य पर्व दीपावली और लक्ष्मी पूजन प्रदोष काल में करने की परंपरा है। इसलिए 8 नवंबर रविवार को सुबह अभ्यंग स्नान और रूप चौदस के अनुष्ठान होंगे, जबकि शाम को प्रदोष काल में मां लक्ष्मी का पूजन किया जाएगा।
Diwali 2026: इस बार रूप चतुर्दशी और दीपावली एक ही दिन, दो दिन पहले मनेगी धनतेरस

ज्योतिर्विद् शिवप्रसाद तिवार ने बताया कि महालक्ष्मी पूजन के अगले दिन 9 नवंबर सोमवार को उदया तिथि में कार्तिक अमावस्या होने से सोमवती अमावस्या का संयोग बनेगा।साथ ही गोवर्धन पूजन एक दिन बाद 10 नवंबर मंगलवार को होगा और शाम को मठ-मंदिर और आश्रमों अन्नकूट महोत्सव होंगे। दीपोत्सव का समापन 11 नवंबर बुधवार को यम द्वितीया यानी भाई दूज के साथ होगा।