
रामकृष्ण मुले, नईदुनिया, इंदौर : बुराई पर अच्छाई के विजय का प्रतीक पर्व दशहरा इस वर्ष अपरान्ह व्यापनी दशमी तिथि में मंगलकारी रवियोग मे 20 अक्टूबर मंगलवार को मनाया जाएगा। इस अवसर पर जहां एक ओर शस्त्र और शमी पूजन होगा वहीं दूसरी ओर शहर में विभिन्न स्थानों पर रावण दहन भी किया जाएगा। ज्योतिर्विदों के अनुसार जहां सुबह महानवमी रहेगी वहीं दोपहर में दशमी तिथि लगेगी।
आचार्य शिवप्रसाद तिवारी के अनुसार अश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 50 मिनिट से अगले दिन 21 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 11 मिनिट तक रहेगा।दशहरा पर्व के लिए उदया तिथि की बजाए प्रदोष काल और विजय मुहूर्त देखा जाता है क्योंकि रावण दहन प्रदोष वेला में करना शुभ माना गया है।
इस कारण दशहरा 20 अक्टूबर को मनाना शास्त्रोक्त होगा। इसे अबुझ मुहूर्त में से एक माना गया है, इसलिए इस दिन नया कार्य, भूमि, भवन और वाहन की खरीदारी भी शुभ फल प्रदान करने वाली मानी गई। श्रवण नक्षत्र का आरंभ 19 अक्टूबर को दोपहर 3 बजकर 38 मिनिट से 20 अक्टूबर को शाम 6 बजकर 2 मिनिट से रहेगा। दशहरे पर दोपहर 12 बजकर 49 मिनिट तक दुर्गा नवमी का बलिदान होगा।
ज्योतिर्विद् विनायक शास्त्री के अनुसार विजयादशमी का शाब्दिक अर्थ विजय की दशमी है। यह पर्व असत्य पर सत्य की जीत का संदेश देता है। इस दिन रावण के प्रतीक स्वरूप अपनी बुराईयों के दहन करने का है। रावण के दस सिर हमारे भीतर के नकारात्मक गुणों को दर्शाते है।
दशमी तिथि पर नौ दिन पूजन के दसवे दिन मां दुर्गा का विसर्जन किया जाता है।इस दिन अस्त्र-शस्त्र, औजारों और वाहनों का पूजा की जाती है। विजय मुहूर्त में शस्त्र पूजन किया जाता है। इस अवसर पर पश्चिम बंगाल में मां दुर्गा का विसर्जन और सिंदूर खेला का उल्लास छाता है। इस दिन मां दुर्गा ने महिषासुर नामक राक्षस के वध के रूप में मनाया जाता है।
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