
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। पति की दीर्घायु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ सौभाग्यवती महिलाएं 29 अक्टूबर, गुरुवार को करवा चौथ का निर्जला व्रत रखेंगी। इस बार भद्रा को लेकर चिंता करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि इसका प्रभाव सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाएगा।
इससे सरगी ग्रहण करने और शाम को पूजा करने की परंपरा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। सोशल मीडिया पर भद्रा को लेकर तमाम भ्रमाक रीलें चल रही हैं। इसमें भद्रा काल के दौरान सजन-संवरने के साथ नये परिधान नही पहनने की सलाह दी जा रही हैं, जो कि शास्त्र सम्मत नहीं हैं।
ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि भद्रा 28 अक्टूबर की सुबह पांच बजकर 31 मिनिट बजे शुरू होकर 29 अक्टूबर की सुबह चार बजकर 27 मिनिट बजे समाप्त होगी।
ऐसे में महिलाएं परंपरानुसार सुबह सरगी ग्रहण कर व्रत शुरू कर सकेंगी। दिनभर निर्जला व्रत रखने के बाद शाम को करवा माता की पूजा-अर्चना कर पति की लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाएगी।
सनातन धर्म मंदिर में सामूहिक करवा चौथ का आयोजन पंजाबी समाज द्वारा किया जायेगा। इसके साथ मल्टी व कालोनियों में सामूहिक करवा चौथ का आयोजन किया जा रहा है।
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करवा चौथ पर पूजा का शुभ मुहूर्त शाम पांच बजकर 38 मिनिट से छह बजकर 56 मिनिट तक पूजन मुहूर्त। इस दौरान महिलाएं विधि-विधान से पूजा करेंगी और व्रत कथा सुनेंगी। इसके बाद चंद्रमा के दर्शन का इंतजार किया जाएगा। चंद्रोदय होने पर चंद्रदेव को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाएगा।
इस दिन चंद्रमा के रात आठ बजकर 12 मिनिट से आठ बजकर 17 मिनिट के बीच निकलने की संभावना है। चंद्रदर्शन और अर्घ्य के बाद महिलाएं व्रत खोलेंगी। करवा चौथ पर निर्जला व्रत, पूजा-अर्चना और चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा का विशेष महत्व है। भद्रा सूर्योदय से पहले समाप्त होने के कारण शाम के पूजन पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। महिलाएं निर्धारित मुहूर्त में पूजा कर पर्व की तैयारियां उत्साह के साथ कर सकती हैं।