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Shardiya Navratri 2025: नवरात्र के पहले दिन से लेकर कन्या पूजन तक, जानें किस दिन क्या करें, मां होंगी खुश

वैदिक पंचांग के अनुसार शारदीय नवरात्र (Navratri 2025 Rules) की शुरुआत आज यानी 22 सितंबर से हो गई है। इस दौरान मां दुर्गा के मंदिरों में बेहद खास रौनक ...और पढ़ें

By Dheeraj BelwalEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Mon, 22 Sep 2025 04:32:13 PM (IST)Updated Date: Mon, 22 Sep 2025 04:32:13 PM (IST)
Shardiya Navratri 2025: नवरात्र के पहले दिन से लेकर कन्या पूजन तक, जानें किस दिन क्या करें, मां होंगी खुश
Shardiya Navratri 2025: शारदीय नवरात्र से जुड़ी पूरी जानकारी।

HighLights

  1. शारदीय नवरात्र का होता है विशेष महत्व।
  2. नवरात्र पर्व प्रतिपदा तिथि से शुरू होता है।
  3. इस दौरान मां दुर्गा के 9 रूपों की होती है पूजा।

धर्म डेस्क। हर साल आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शारदीय नवरात्र (Shardiya Navratri 2025) का शुभारंभ होता है। यह नौ दिनों का पर्व मां दुर्गा की उपासना, व्रत और साधना के लिए विशेष माना जाता है। इस दौरान भक्त विधि-विधान से मां दुर्गा की पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं।

नवरात्र का प्रारंभ और कलश स्थापना

शारदीय नवरात्र 2025 की शुरुआत प्रतिपदा तिथि से होगी। पहले दिन कलश स्थापना की जाती है, साथ ही अखंड ज्योत प्रज्वलित की जाती है। मान्यता है कि अखंड ज्योत और पूजा-पाठ से साधक के जीवन में सुख-समृद्धि आती है और देवी मां की कृपा प्राप्त होती है।


अखंड ज्योत से जुड़े नियम

नवरात्रि के पहले दिन जलाई गई अखंड ज्योत नवमी तिथि तक जलती रहनी चाहिए। कन्या पूजन के बाद नवरात्र का समापन होता है, लेकिन ज्योत को स्वयं ही बुझने देना चाहिए। इसे जबरन बुझाना अशुभ माना जाता है। यदि ज्योत मिट्टी के दीपक में जलाई गई है तो नवमी या दशहरे के दिन दीपक और पूजन सामग्री को किसी पवित्र नदी में विसर्जित करना चाहिए।

पूजन मंत्र

नवरात्रि पूजन और दीपक जलाते समय विशेष मंत्रों का उच्चारण किया जाता है।

मां दुर्गा स्तुति मंत्र

ॐ जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।

दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते॥

(अर्थ: मां जगदंबा, जो जयंती, मंगला, काली, भद्रकाली, कपालिनी, दुर्गा, क्षमा, शिवा, धात्री और स्वधा नामों से जानी जाती हैं, उन्हें नमस्कार है।)

दीपक स्तुति मंत्र

शुभं करोति कल्याणम् आरोग्यम् धनसंपदा।

शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तुते॥

(अर्थ: दीपक की ज्योति शुभ और कल्याण करने वाली है, जो स्वास्थ्य, धन और शत्रुओं का नाश करती है, उसे नमस्कार है।)

ज्योत की बाती बदलते समय ध्यान रखें कि उसी ज्योत से एक छोटा दीपक अलग से जलाकर बाती बदलें। यदि मुख्य ज्योत बुझ भी जाए, तो उसी छोटे दीपक से दोबारा जलाई जा सकती है।

कन्या पूजन का महत्व

नवरात्रि की अष्टमी या नवमी तिथि को कन्या पूजन किया जाता है। मान्यता है कि कन्याएं मां लक्ष्मी का स्वरूप होती हैं। इसे कंजक पूजन भी कहा जाता है।

कन्या पूजन की विधि

सुबह स्नान के बाद मंदिर की सफाई करें।

कन्याओं के लिए सात्विक भोजन जैसे पूरी, चना, हलवा और सब्जी बनाएं।

मां दुर्गा की पूजा कर मंत्रों का जप और कथा का पाठ करें।

नौ छोटी कन्याओं और एक बालक को आमंत्रित कर उनके पैर धोएं, तिलक लगाएं और भोजन कराएं।

भोजन के बाद श्रद्धा अनुसार दक्षिणा, चुनरी या उपहार दें और उनका आशीर्वाद लें।

यह भी पढ़ें- दुर्गा जी की आरती: जय अम्बे गौरी, मैया जय अम्बे गौरी… शारदीय नवरात्रि पर यहां पढ़ें Durga Ji Ki Aarti…

अखंड ज्योत का विसर्जन

नवमी या दशहरे के दिन जब अखंड ज्योत स्वयं शांत हो जाए तो दीपक की बाती और पूजन सामग्री को किसी पवित्र नदी में विसर्जित करना चाहिए। वहीं श्रृंगार का सामान और लाल चुनरी किसी जरूरतमंद को दान कर देना शुभ माना जाता है।

इस प्रकार, शारदीय नवरात्र 2025 में मां दुर्गा की साधना, अखंड ज्योत और कन्या पूजन के नियमों का पालन करने से साधक को सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। नईदुनिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। नईदुनिया अंधविश्वास के खिलाफ है।