भगवान भैरव का नाम इसलिए है 'बटुक' भैरव
उन्होंने अपने पुत्र का नाम शिवदर्शन रखा लेकिन भगवान शिव नें उसका एक नाम और रखा जो था 'बटुक'। ...और पढ़ें
By Edited By:
Publish Date: Tue, 26 May 2015 12:51:47 PM (IST)Updated Date: Wed, 27 May 2015 09:01:54 AM (IST)
'बटुक' का अर्थ होता है छोटी उम्र का बालक। यानी आठ वर्ष से कम उम्र के बालक को 'बटुक' कहा जाता है। वर्णन मिलता है कि महर्षि दधीचि भगवान शिव के परम भक्त थे।
उन्होंने अपने पुत्र का नाम शिवदर्शन रखा लेकिन भगवान शिव नें उसका एक नाम और रखा जो था 'बटुक'। श्री बटुक भैरव जयंती 28 मई 2015 (गुरुवार) के दिन है।
पंडित 'विशाल' दयानंद शास्त्री बताते हैं कि यह नाम भगवान शिव को प्रिय है। इसीलिए बटुक भैरव को भगवान शिव का बालरूप माना जाता है। इनकी वेश-भूषा शिव के समान ही है। इनको श्याम वर्ण माना गया है। इनके भी चार भुजाएं हैं, जिनमें भैरव जी ने त्रिशूल, खड़ग, खप्पर तथा नरमुंड धारण कर रखा है।
परन्तु जैसा कि पहले ही बताया गया कि वास्तव में इनका अवतरण ब्रह्मदेव के कार्यों में सहयोग करने के लिए हुआ है।
पढ़ें: शास्त्रों में वर्णित है बटुक भैरव की महिमा
बटुक भैरवजी तुरंत ही प्रसन्न होने वाले दुर्गा के पुत्र हैं। बटुक भैरव की साधना से व्यक्ति अपने जीवन में सांसारिक बाधाओं को दूर कर सांसारिक लाभ उठा सकता है।