
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन : अश्विन शुक्ल प्रतिपदा पर रविवार को शारदीय नवरात्र का आरंभ हो गया है। इस बार माता दुर्गा हाथी पर सवार होकर आईं हैं। धर्मशास्त्र के जानकारों के अनुसार गजवाहिनी दुर्गा सुख, समृद्धि लाएंगी। इस बार नवरात्र पूरे नौ दिन के रहेंगे।
अष्टमी तिथि को लेकर विद्वानों में मतांतर दिखाई दे रहा है। कुछ विद्वान 18 अक्टूबर को अष्टमी तिथि होना बता रहे हैं। वहीं कुछ विद्वान 19 नवंबर को उदयकाल में अष्टमी तिथि को सर्वश्रेष्ठ मान रहे हैं। शारदीय नवरात्र में सर्वार्थसिद्धि, अमृत सिद्धि योग का शुभ संयोग भी बन रहा है, जो साधना आराधना की दृष्टि से सर्वश्रेष्ठ है।
ज्योतिषाचार्य पं.अमर डब्बावाला ने बताया श्रीमद् देवी भागवत पुराण के अनुसार जिस दिन से नवरात्र का आरंभ होता है। उस दिन के वार के अनुसार माता का वाहन तय होता है। इस बार रविवार के दिन नवरात्र का आरंभ हो रहा है, इसलिए माता दुर्गा का वाहन हाथी है।
हाथी पर सवार माता दुर्गा की आराधना भक्तों के लिए मंगलकारी है। इससे भारतीय अर्थ व्यवस्था में भी बढ़ोतरी होगी। इस बार नवरात्र में 14 अक्टूबर को अमृत सिद्धि योग रहेगा। वहीं 18 व 19 अक्टूबर को सर्वार्थसिद्धि योग की साक्षी रहेगी। इन विशिष्ट योगों में देवी दुर्गा की साधना मनोवांछित फल प्रदान करने वाली मानी गई है।
पहले दिन अष्टमी साठ घटी तो वही मान्य
शारदीय नवरात्र में महाअष्टमी की पूजा 18 अक्टूबर रविवार के दिन होगी। इस दिन अष्टमी तिथि 60 घटी है, जबकि अगले दिन 19 अक्टूबर को 3 से 4 घटी रहेगी। धर्मशास्त्र धर्मसिंधु की मान्यता के अनुसार अगर अष्टमी तिथि पहले दिन 60 घटी हो तो वही मान्य है। इसलिए 18 अक्टूबर को महाअष्टमी की पूजा शास्त्र सम्मत है। -पं. हरिहर पंड्या, ज्योतिर्विद
शारदीय नवरात्र में 19 अक्टूबर को सुबह सूर्योदय से सुबह 10 बजकर 31 मिनट तक अष्टमी तिथि रहेगी। इसके बाद नवमी तिथि लग जाएगी। धर्मशास्त्र की मान्यता के अनुसार यदि शुद्ध अष्टमी तिथि की साक्षी में दिनभर विशेष पूजा हवन, कन्या पूजन करना चाहते हैं, तो 19 अक्टूबर को उदयकालीन तिथि को ग्राह्य करना चाहिए। -ब्रह्मश्री चिलकमर्थि प्रभाकर चक्रवर्ती शर्मा, ज्योतिषाचार्य
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