
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। दशहरे पर जहां देशभर में बुराई के प्रतीक रावण का दहन किया जाता है, वहीं जबलपुर से करीब 32 किलोमीटर दूर पाटन में एक परिवार ऐसा भी है, जो इसी दिन लंकेश की पूजा करता है।
नामदेव परिवार में करीब पांच दशक से चली आ रही यह परंपरा अब एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंच गई है। पिता की मौत के बाद बेटे ने रावण की पूजा की जिम्मेदारी संभाल ली है।
परिवार के मुताबिक इस परंपरा की शुरुआत वर्ष 1975 में संतोष नामदेव उर्फ लंकेश ने की थी। इसके बाद हर दशहरे पर परिवार की ओर से रावण की पूजा की जाने लगी। समय के साथ यह परंपरा परिवार की पहचान बन गई।
परिवार के सदस्य बताते हैं कि उनके लिए रावण केवल दहन किए जाने वाला पात्र नहीं, बल्कि धार्मिक और ऐतिहासिक संदर्भों से जुड़ा चरित्र है। इसी मान्यता के चलते परिवार ने वर्षों पहले शुरू की गई पूजा की परंपरा को आज भी कायम रखा है।
पिता के निधन के बाद अब उनके बेटे ने यह जिम्मेदारी संभाली है। उनका कहना है कि पिता ने जिस परंपरा को शुरू किया और वर्षों तक निभाया, उसे आगे बढ़ाना उनके लिए जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जब तक वह जीवित हैं, परिवार की यह परंपरा जारी रखेंगे।
पाटन में दशहरे के मौके पर नामदेव परिवार की यह परंपरा स्थानीय स्तर पर भी चर्चा का विषय रहती है। एक ओर जहां विजयादशमी पर रावण दहन के आयोजन होते हैं।
इस दिन लंकेश की पूजा करने वाला यह परिवार अपनी अलग मान्यता और परंपरा के कारण लोगों का ध्यान आकर्षित करता है। करीब पांच दशक से चली आ रही यह परंपरा अब परिवार की विरासत बन चुकी है।
यह भी पढ़ें- जबलपुर में नो एंट्री ड्यूटी को लेकर टीआई से विवाद में दांत तोड़े, वर्दी फाड़ी; हेड कांस्टेबल ही निलंबित