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जबलपुर के पाटन में नामदेव परिवार दशहरे पर करता है लंकेश की पूजा, बेटा निभा रहा अनोखी परंपरा

खास बात यह है कि जिस दिन देश के अधिकांश हिस्सों में रावण के पुतले का दहन होता है, उसी दिन नामदेव परिवार लंकेश को श्रद्धा के साथ याद करता है।

By Dheeraj kumar BajpaiEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Tue, 20 Oct 2026 04:05:27 PM (IST)Updated Date: Tue, 20 Oct 2026 04:05:27 PM (IST)
जबलपुर के पाटन में नामदेव परिवार दशहरे पर करता है लंकेश की पूजा, बेटा निभा रहा अनोखी परंपरा
जबलपुर से करीब 32 किलोमीटर दूर पाटन में रावण की आरती उतारते संतोष नामदेव के बेटे। सौजन्‍य सोशल मीडिया

HighLights

  1. दशहरे पर रावण की पूजा करता है नामदेव परिवार
  2. 1975 में संतोष नामदेव उर्फ लंकेश ने शुरू की परंपरा
  3. पिता की मौत के बाद बेटे ने संभाली जिम्मेदारी

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। दशहरे पर जहां देशभर में बुराई के प्रतीक रावण का दहन किया जाता है, वहीं जबलपुर से करीब 32 किलोमीटर दूर पाटन में एक परिवार ऐसा भी है, जो इसी दिन लंकेश की पूजा करता है।

पांच दशक पुरानी परंपरा दूसरी पीढ़ी तक पहुंची

नामदेव परिवार में करीब पांच दशक से चली आ रही यह परंपरा अब एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंच गई है। पिता की मौत के बाद बेटे ने रावण की पूजा की जिम्मेदारी संभाल ली है।

समय के साथ यह परंपरा परिवार की पहचान बन गई

परिवार के मुताबिक इस परंपरा की शुरुआत वर्ष 1975 में संतोष नामदेव उर्फ लंकेश ने की थी। इसके बाद हर दशहरे पर परिवार की ओर से रावण की पूजा की जाने लगी। समय के साथ यह परंपरा परिवार की पहचान बन गई।

धार्मिक और ऐतिहासिक संदर्भों से जुड़ा चरित्र

परिवार के सदस्य बताते हैं कि उनके लिए रावण केवल दहन किए जाने वाला पात्र नहीं, बल्कि धार्मिक और ऐतिहासिक संदर्भों से जुड़ा चरित्र है। इसी मान्यता के चलते परिवार ने वर्षों पहले शुरू की गई पूजा की परंपरा को आज भी कायम रखा है।


बेटा बोला-पिता की शुरू की परंपरा जारी रखेंगे

पिता के निधन के बाद अब उनके बेटे ने यह जिम्मेदारी संभाली है। उनका कहना है कि पिता ने जिस परंपरा को शुरू किया और वर्षों तक निभाया, उसे आगे बढ़ाना उनके लिए जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जब तक वह जीवित हैं, परिवार की यह परंपरा जारी रखेंगे।

परंपरा स्थानीय स्तर पर भी चर्चा का विषय

पाटन में दशहरे के मौके पर नामदेव परिवार की यह परंपरा स्थानीय स्तर पर भी चर्चा का विषय रहती है। एक ओर जहां विजयादशमी पर रावण दहन के आयोजन होते हैं।

यह परंपरा अब परिवार की विरासत बन चुकी

इस दिन लंकेश की पूजा करने वाला यह परिवार अपनी अलग मान्यता और परंपरा के कारण लोगों का ध्यान आकर्षित करता है। करीब पांच दशक से चली आ रही यह परंपरा अब परिवार की विरासत बन चुकी है।

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