शुरू हुआ भगवान विष्णु का सबसे प्रिय 'कार्तिक मास'! करवा चौथ से देव दीपावली तक लगेगी महापर्वों की झड़ी
हिंदू पंचांग के अनुसार भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित पवित्र कार्तिक मास का शुभारंभ हो गया है। धार्मिक मान्यताओं में इस पूरे महीने ब्रह्म मुहूर्त में स्नान, ध्यान, तुलसी पूजन और दीपदान का अत्यधिक पुण्यदायी महत्व बताया गया है।
Publish Date: Tue, 27 Oct 2026 12:08:46 PM (IST)Updated Date: Tue, 27 Oct 2026 12:08:46 PM (IST)
हिंदू धर्म के सबसे पवित्र महीने कार्तिक मास की शुरुआतHighLights
- हिंदू धर्म के सबसे पवित्र महीने कार्तिक मास की शुरुआत
- भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की आराधना का महापर्व
- ब्रह्म मुहूर्त स्नान, तुलसी पूजा, दीपदान का विशेष महत्व
धर्म डेस्क। सनातन धर्म में सबसे पावन और फलदायी माने जाने वाले 'कार्तिक मास' का शुभारंभ आज, 27 अक्टूबर 2026 से हो गया है। भगवान श्री हरि विष्णु और धन-वैभव की अधिष्ठात्री देवी माता लक्ष्मी की आराधना को समर्पित यह पवित्र महीना आगामी 24 नवंबर 2026 (कार्तिक पूर्णिमा) तक चलेगा।
पुराणों और शास्त्रों के अनुसार, कार्तिक मास में किया गया थोड़ा-सा भी सत्कर्म, जप, तप, दीपदान और पवित्र स्नान अक्षय पुण्य प्रदान करता है। इस पूरे महीने में सात्त्विक जीवनशैली, तुलसी सेवा और दीपदान के माध्यम से परिवार में सुख-समृद्धि, दीर्घायु और आरोग्य की प्राप्ति होती है।
आइए जानते हैं कार्तिक मास का धार्मिक महत्व, स्नान-पूजन के विधान, दीपदान और इस दौरान पालन किए जाने वाले मुख्य नियम-
ब्रह्म मुहूर्त स्नान का महत्व: घर पर कैसे करें पवित्र स्नान?
कार्तिक मास में सूर्योदय से पूर्व यानी ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करने का विशेष विधान है-
- सूर्योदय से पूर्व स्नान: मान्यता है कि कार्तिक में ब्रह्म मुहूर्त में जल में सभी तीर्थों का वास होता है। इस समय स्नान कर भगवान विष्णु का स्मरण करने से मानसिक शुद्धि और पापों से मुक्ति मिलती है।
- घर पर स्नान का विधान: यदि गंगा या किसी पवित्र नदी-सरोवर में स्नान संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के सामान्य पानी में थोड़ा-सा गंगाजल मिलाकर तीर्थों का ध्यान करते हुए स्नान किया जा सकता है। स्नान के बाद श्वेत या पीले स्वच्छ वस्त्र पहनकर सूर्यदेव को अर्घ्य दें और इष्टदेव की आराधना करें।
तुलसी पूजन का विशेष विधान और जरूरी सावधानियां
भगवान विष्णु को 'तुलसी' अत्यंत प्रिय हैं, इसलिए पूरे कार्तिक मास में तुलसी पूजन को सर्वोपरि माना गया है-
- दैनिक सेवा: प्रतिदिन सुबह तुलसी के पौधे में शुद्ध जल अर्पित करें और शाम के समय गाय के घी या तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करें।
- साफ-सफाई और सुरक्षा: तुलसी चौरे के आसपास हमेशा शुचिता (सफाई) बनाए रखें। पौधे की उचित देखभाल करें और दीपक जलाते समय सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें ताकि कपड़ों या लताओं में आग न लगे।
कार्तिक मास में दीपदान का महत्व
कार्तिक मास में दीपदान को अंधकार पर प्रकाश और अज्ञान पर ज्ञान की विजय का प्रतीक माना गया है। इस पूरे महीने मंदिरों, नदी घाटों, तुलसी के पौधे, घर के आंगन और मुख्य द्वार पर दीपक जलाने का विधान है। दीपदान से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मां लक्ष्मी का स्थायी वास बनता है।
कार्तिक मास के 7 प्रमुख नियम
कार्तिक मास के दौरान श्रद्धालुओं को इन नियमों का विशेष रूप से पालन करना चाहिए:
- जल्दी उठना और नियमित पूजा: ब्रह्म मुहूर्त में जागकर नित्य स्नान करें और भगवान विष्णु तथा माता लक्ष्मी की संयुक्त आराधना करें।
- सात्त्विक खान-पान: इस पूरे महीने तामसिक भोजन, मदिरा और गरिष्ठ पदार्थों से पूरी तरह परहेज करें तथा सात्त्विक और सुपाच्य आहार ग्रहण करें।
- तुलसी सेवा और दीपदान: नियमित रूप से तुलसी के पौधे और घर के मुख्य द्वार पर संध्या दीपदान करें।
- दान-पुण्य: अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, जूते-चप्पल या धन का दान करें।
- वाणी और व्यवहार में संयम: किसी के प्रति अपशब्द न बोलें, गृह-क्लेश से बचें और व्यवहार में मधुरता और धैर्य बनाए रखें।
- दूसरों की सेवा: असहायों और वृद्धों की सहायता कर सेवा भाव को जीवन में अपनाएं।
- स्वास्थ्य का ध्यान: व्रत अथवा उपवास रखते समय अपने स्वास्थ्य, उम्र और शारीरिक क्षमता की अनदेखी न करें।
कार्तिक मास में आने वाले प्रमुख महापर्व
कार्तिक का महीना हिंदू पंचांग के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण त्योहारों का केंद्र होता है-
- करवा चौथ: सुहागिनों द्वारा पति की लंबी उम्र के लिए रखा जाने वाला निर्जला व्रत।
- धनतेरस (धनत्रयोदशी): आरोग्य के देवता भगवान धन्वंतरि, कुबेर पूजन और यम दीपम का दिन।
- दीपावली (दीलावी): माता लक्ष्मी और भगवान श्री गणेश के पूजन का प्रकाश पर्व।
- गोवर्धन पूजा (अन्नकूट): भगवान श्री कृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने की स्मृति और गौ-माता के पूजन का दिन।
- भाई दूज (यम द्वितीया): भाई-बहन के अटूट स्नेह और रक्षा का पर्व।
- कार्तिक पूर्णिमा (देव दीपावली): पवित्र स्नान, महादान और गंगा घाटों पर दीपदान का महापर्व।
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