
धर्म डेस्क। पति की दीर्घायु और सुखी दांपत्य जीवन की कामना के साथ गुरुवार को सुहागिनों ने करवा चौथ का निर्जला व्रत रखा है। शाम ढलते ही महिलाओं की निगाहें आसमान पर टिकेंगी। लेकिन मौसम में बदलाव, बादलों की आवाजाही और बारिश की आशंका ने चांद के दीदार को लेकर चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि चंद्रोदय के समय आसमान में बादल छाए रहें और चंद्रमा दिखाई न दे, तो महिलाएं व्रत का पारण कैसे करें?
धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित परंपराओं में ऐसी स्थिति के लिए कुछ वैकल्पिक विधान बताए गए हैं। हालांकि, चंद्र दर्शन के विकल्प को लेकर सभी क्षेत्रों और परिवारों में एक जैसी मान्यता नहीं है। ऐसे में अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय विद्वान की सलाह के अनुसार निर्णय लेना उचित होगा।
1. चंद्रोदय के समय का रखें ध्यान: जबलपुर में गुरुवार को चंद्रोदय का अनुमानित समय रात 8:15 से 8:20 बजे के आसपास बताया गया है। बादलों, धुंध और स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों के कारण चंद्रमा दिखाई देने में देर हो सकती है। इसलिए निर्धारित समय के बाद कुछ देर तक आसमान साफ होने की प्रतीक्षा की जा सकती है।
2. चंद्रमा की दिशा में अर्घ्य: यदि बादलों के कारण चंद्रमा दिखाई नहीं देता, तो कुछ प्रचलित धार्मिक विधानों के अनुसार स्थानीय चंद्रोदय का समय देखकर चंद्रमा की दिशा की ओर मुख करके चंद्रदेव का स्मरण किया जाता है। इसके बाद जल से अर्घ्य देकर प्रार्थना की जाती है। इस विकल्प को सभी परंपराओं में समान रूप से मान्य नहीं माना जाता, इसलिए परिवार के पुरोहित से परामर्श लेना बेहतर होगा।
3. भगवान शिव का करें स्मरण: भगवान शिव के मस्तक पर चंद्रमा विराजमान हैं। कुछ धार्मिक मान्यताओं में चंद्र दर्शन संभव नहीं होने पर शिव-पार्वती की पूजा और चंद्रदेव के स्मरण को सहायक विकल्प माना जाता है। महिलाएं घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित कर पूजा-अर्चना और प्रार्थना कर सकती हैं।
4. प्रतीकात्मक चंद्रमा की पूजा: कुछ स्थानों पर पूजा की थाली में चावल या रोली से चंद्रमा की आकृति बनाकर पूजा करने की परंपरा भी बताई जाती है। हालांकि, इसे चंद्र दर्शन का सार्वभौमिक अथवा अनिवार्य विकल्प नहीं माना जा सकता। इस विधान को अपनाने से पहले अपनी पारिवारिक परंपरा का ध्यान रखना चाहिए।
करवा चौथ की पारंपरिक पूजा में चंद्रमा को अर्घ्य देने, छलनी से चंद्र दर्शन करने और फिर पति का चेहरा देखकर व्रत खोलने का विशेष महत्व है। यदि मौसम के कारण चंद्रमा दिखाई नहीं देता, तो इस क्रम को लेकर असमंजस होना स्वाभाविक है।
ऐसी स्थिति में जल्दबाजी करने के बजाय स्थानीय चंद्रोदय के समय की पुष्टि करें। कुछ देर प्रतीक्षा के बाद भी चंद्रमा दिखाई नहीं दे तो परिवार के बुजुर्गों अथवा पुरोहित से पूछकर प्रचलित वैकल्पिक विधान के अनुसार पूजा और पारण किया जा सकता है। दूसरे शहर में चंद्र दर्शन होने का वीडियो मोबाइल पर देखकर व्रत खोलना भी कुछ लोग विकल्प मानते हैं, लेकिन यह परंपरागत चंद्र दर्शन का सर्वमान्य विकल्प नहीं है।
करवा चौथ प्रेम, विश्वास और दांपत्य की मंगलकामना का पर्व है। व्रत की धार्मिक भावना के साथ अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है। निर्जला व्रत के दौरान कमजोरी, चक्कर या अस्वस्थता महसूस होने पर स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें। गर्भवती महिलाओं, मधुमेह से पीड़ित लोगों और नियमित दवाएं लेने वालों को चिकित्सकीय सलाह के अनुरूप ही उपवास करना चाहिए।
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