
धर्म डेस्क। अखंड सौभाग्य और पति की दीर्घायु का महापर्व करवाचौथ 29 अक्टूबर को पूरे श्रद्धाभाव से मनाया जाएगा। सुहागिन महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखकर रात में चंद्र दर्शन और अर्घ्य के बाद अपना व्रत पूर्ण करेंगी। हालांकि, इस बार चक्रवात 'अर्नब' के प्रभाव के चलते मध्य प्रदेश के कई संभागों में बादलों का डेरा और बारिश होने का अनुमान है, जिससे व्रतियों को चांद के दीदार के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।
खगोलीय और भौगोलिक गणनाओं के अनुसार, प्रदेश के सुदूर पूर्वी छोर और पश्चिमी छोर के बीच चंद्रोदय के समय में लगभग 40 मिनट का बड़ा अंतर रहेगा।

नेशनल अवॉर्डी विज्ञान प्रसारक सारिका घारू के अनुसार-
पृथ्वी का घूर्णन: पृथ्वी अपनी धुरी पर पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है।
रीवा, शहडोल, जबलपुर और सागर संभाग में चक्रवाती असर के चलते तेज बारिश का अनुमान है। वहीं, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम, ग्वालियर और चंबल संभाग में आसमान में घने बादल छाए रह सकते हैं।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, सारणी में दिया गया समय क्षितिज पर उदित होने का है। यदि आपके क्षेत्र में ऊंची इमारतें, पहाड़ियां, कोहरा या बादल हुए तो आंखों से प्रत्यक्ष चांद देखने में तय समय से 10 से 15 मिनट का अतिरिक्त समय लग सकता है।
यदि चक्रवात और घने बादलों के कारण आपके शहर में चांद प्रत्यक्ष रूप से दिखाई न दे, तो परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। विज्ञान प्रसारक और पंचांगीय नियमों के अनुसार, महिलाएं अपने संबंधित जिले के तय चंद्रोदय समय के बीत जाने के बाद पूर्व-उत्तर दिशा की ओर मुख करके चंद्रमा की उपस्थिति मानकर विधि-विधान से अर्घ्य दे सकती हैं और अपना व्रत पूर्ण कर सकती हैं।
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