
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। सर्वार्थसिद्धि योग में सोमवार को माघी गुप्त नवरात्र का आरंभ हो गया। इस बार नवरात्र पूरे नौ दिन के रहेंगे। साधक तंत्र, मंत्र व यंत्र की सिद्धि के लिए गुप्त साधना करेंगे। शक्तिपीठ हरसिद्धि सहित शहर के अन्य देवी मंदिरों में माता का नितनया शृंगार होगा। हरसिद्धि माता मंदिर में प्रतिदिन संध्या आरती के समय दीपमालिका प्रज्वलित की जाएगी।
श्रीमद् देवी भागवत महापुराण में वर्षभर में चार नवरात्र की मान्यता है। इसमें दो प्राकट्य व दो गुप्त नवरात्र मानी गई है। माघ व आषाढ़ मास के नवरात्र गुप्त तथा चैत्र व अश्विन मास के नवरात्र प्राकट्य नवरात्र कहे गए हैं। पंचांग की गणना के अनुसार 19 जनवरी सोमवार को प्रतिपदा तिथि पर उत्तराषाढ़ा नक्षत्र, वज्र योग तथा मकर राशि के चंद्रमा की साक्षी में गुप्त नवरात्र का आरंभ होगा।
मध्याह्नकाल में शुभ अभिजीत के समय सर्वार्थसिद्धि योग का संयोग रहेगा। सर्वार्थसिद्धि योग प्रत्येक शुभ कार्य को सफल करने वाला माना गया है। इस योग में किए गए शुभ मांगलिक कार्य मनोरथ पूर्ण करते हैं। इस योग में साधना, आराधना की शुरुआत करने से यह शीघ्र फलित होती है।
ज्योतिषाचार्य पं. अमर डब्बावाला ने बताया माघ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी पर्यंत गुप्त नवरात्र का अनुक्रम रहता है। यह साधक और आराधकों के लिए विशेष महत्वपूर्ण होती है। इस कालखंड में सूर्य का उत्तरायण होता है, जो शुभ मांगलिक कार्यों के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।
ग्रह योग की गणना भी इस बार श्रेष्ठ है जो साधना का अनुकूल और मनवांछित फल प्रदान कर सकती है। इस बार नवरात्र के नौ दिनों में दो सर्वार्थ सिद्धि योग है और चार रवि योग का संयोग बन रहा है। विशिष्ट योग नक्षत्रों की साक्षी में देवी की आराधना मनोवांछित फल प्रदान करेगी।
पंचांग की गणना के अनुसार देखें तो माघ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से लेकर के नवमी पर्यंत त्योहार की भी विशिष्ट श्रृंखला रहती है। इनमें गौरी तृतीया, वरद तिल कुंद चतुर्थी, वसंत पंचमी, खटवांग जयंती, नर्मदा जयंती रथ आरोग्य सप्तमी, भीष्म अष्टमी आदि विशेष पर्व आते हैं।
इस दौरान तीर्थ पर एवं देवी प्रतिमा का विशेष पूजन किया जाता है। वसंत पंचमी पर माता सरस्वती की कृपा प्राप्त करने के लिए विद्यार्थियों को वासंती फूलों से पूजन करना चाहिए। नर्मदा जयंती पर संतान की दीर्घायु के लिए पूजा अर्चना करने का विधान है।