नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। वर्षों से चली आ रही परंपरानुसार कुछ महाराष्ट्रीयन परिवारों में विघ्नहर्ता के साथ ज्येष्ठा एवं कनिष्ठा गौरी विराजित होगी। इन परिवारों में महालक्ष्मी पूजन के तीन दिवसीय पर्व की शुरुआत 31 अगस्त से होगी। पहले दिन रविवार को माता का आगमन, दूसरे दिन सोमवार को छप्पन भोग लगाया जाएगा और अंतिम दिन मंगलवार को सुख समृद्धि की कामना का साथ विदाई दी जाएगी।
घरों में महालक्ष्मी आली घरात सोन्याच्या पायानी... भर भराटी घेउन आली सर्व समृद्धि घेऊन आली पंक्तियों के साथ हल्दी-कुमकुम के छापे लगाकर प्रवेश कराया जाएगा। इस अवसर पर घर में उत्सवी उल्लास रहेगा। इस दौरान विवाहित बेटियां के आगमन से घर चहकेगा और नाते-रिश्तेदार एवं स्नेहीजन दर्शन के लिए आएंगे।
सुखलिया निवासी रिया कुंजीर एवं निहारिका कुंजीर ने बताया कि महिलाओं द्वारा हल्दी और कुमकुम के पदचिह्नों के छापे लगाकर 31 अगस्त को शुभ मुहूर्त में महालक्ष्मी की स्थापना की जाएगी। इस दौरान विशेष श्रृंगार कर आरती के साथ नैवेद्य लगाया जाएगा। दूसरे दिन महापूजा के साथ पूरण पोली और 16 प्रकार के व्यंजनों का महाभोग लगेगा। सुहागिन महिलाओं और ब्राह्मण को भोजन कराया जाएगा।
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अंतिम दिन मंगलवार को महाआरती के बाद महालक्ष्मी रूपी ज्येष्ठा और कनिष्ठा गौरी को विधि-विधान से विदाई दी जाएगी। आशा गौरे बताते है कि बेटी को लक्ष्मी कहा गया है और यह त्योहार पुत्री और महालक्ष्मी के मायके आने की खुशी में मनाया जाता है। परिवार वालों की सेवा से खुश होकर मां गौरी सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देकर जाती है।