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Mahashivratri 2026: 15 फरवरी को छह ग्रहों के पुनरावृत्ति योग में मनेगी महाशिवरात्रि, सूर्य, बुध, शुक्र, राहु, केतु, चंद्रमा एक साथ बना रहे हैं खास सर्वार्थसिद्धि योग

इस बार 19 साल बाद 15 फरवरी को छह ग्रहों के पुनरावृत्ति योग में महाशिवरात्रि मनाई जाएगी। महाशिवरात्रि पर रविवार का दिन, उत्तराषाढ़ा नक्षत्र, व्यतिपात य...और पढ़ें

By Rajesh VermaEdited By: Roman Tiwari
Publish Date: Tue, 03 Feb 2026 07:04:54 AM (IST)Updated Date: Tue, 03 Feb 2026 07:07:25 AM (IST)
Mahashivratri 2026: 15 फरवरी को छह ग्रहों के पुनरावृत्ति योग में मनेगी महाशिवरात्रि, सूर्य, बुध, शुक्र, राहु, केतु, चंद्रमा एक साथ बना रहे हैं खास सर्वार्थसिद्धि योग
महाशिवरात्रि पर सर्वार्थसिद्धि योग बन रही है

HighLights

  1. छह ग्रहों के पुनरावृत्ति योग में महाशिवरात्रि
  2. ग्रहों के युतियोग में भगवान शिव की आराधना
  3. महाशिवरात्रि पर बन रहा विशेष सर्वार्थसिद्धि योग

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन: पंचांग की गणना के अनुसार 19 साल बाद 15 फरवरी को छह ग्रहों के पुनरावृत्ति योग में महाशिवरात्रि मनाई जाएगी। वर्ष 2007 में महाशिवरात्रि के दिन सूर्य, बुध, शुक्र, राहु, केतु, चंद्रमा एक साथ मौजूद थे। वर्ष 2026 में एक बार यह ग्रह एक साथ रहेंगे। प्रमुख ग्रहों के युतियोग में भगवान शिव की आराधना का प्रकृति व मनुष्य पर विशेष प्रभाव रहता है। विभिन्न राशि के जातक इससे लाभान्वित होंगे।

ज्योतिषाचार्य पं.अमर डब्बावाला ने बताया महाशिवरात्रि पर सूर्य, बुध, शुक्र व राहु यह कुंभ राशि पर गोचरस्थ रहेंगे। वहीं केतु सिंह राशि में अवस्थित होंगे तथा चंद्रमा का संचार मकर राशि पर रहेगा। एक बात स्पष्ट है कि महाशिवरात्रि का पर्व काल मकर राशि के चंद्रमा की साक्षी में ही आता है। लेकिन शिव आराधना के इस विशिष्ट काल खंड में शेषग्रह अगर एक साथ रहते हैं, तो यह साधना, आराधना की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। अलग-अलग प्रहर में इसकी पूजा का विशेष शुभफल प्राप्त होता है।


सर्वार्थसिद्धि योग का निर्माण होगा

महाशिवरात्रि पर रविवार का दिन, उत्तराषाढ़ा नक्षत्र, व्यतिपात योग, वनिज उपरांत शकुनी करण तथा मकर राशि का चंद्रमा रहेगा। पंचांग की यह स्थित सर्वार्थसिद्धि योग का निर्माण करेगी। सर्वार्थसिद्धि योग में संकल्प अनुसार शिव पार्वती की पूजा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

चार प्रहर की पूजा मान्य

महाशिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा का विधान है। चार प्रहर प्रदोषकाल, निशिथ काल, मध्यरात्रि और ब्रह्म मुहूर्त माने गए हैं। 15 फरवरी को प्रथम प्रहर प्रदोषकाल का समय शाम 6.10 बजे से रहेगा। दूसरा प्रहर रात्रि 9.40 बजे से शुरु होगा। तीसरा प्रहर मध्य रात्रि 12.41 बजे से तथा चौथा प्रहर रात 3.18 बजे से सुबह 5 बजे ब्रह्म मुहूर्त तक रहेगा। महानिशाकाल का यही वह समय है, जिसमें ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में भी भगवान महाकाल की महापूजा की जाती है।

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विवाह नहीं, शिवतत्व की आराधना का दिन

अखिल भारतीय पुजारी महासंघ के राष्ट्रीय सचिव पं.रूपेश मेहता ने बताया वेदों, पुराणों और धर्मग्रंथों में भगवान शिव की महिमा, आराधना और भक्ति का विशेष महत्व बताया गया हैं। जिसमें शिवरात्रि महापर्व बहुत पुण्यदायी बताया गया हैं। यह पर्व शिवतत्व को जानने और आराधना का पर्व है।

लोकपरंपरा में इस दिन को शिव पार्वती विवाह का दिन माना जाता है, लेकिन भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के बारे में जानकारी शिवपुराण के रुद्र संहिता में मिलती है, उनका विवाह मार्गशीर्ष मास में सोमवार को रोहिणी नक्षत्र ओर सभी ग्रहों के शुभ स्थानों पर स्थित होने पर हुआ।