दरअसल, मकर संक्रांति पर चावल से बनी खिचड़ी का दान और भोग करने की परंपरा है। कई स्थानों पर इस पर्व को खिचड़ी पर्व भी कहा जाता है। वहीं, एकादशी व्रत में चावल का सेवन वर्जित माना गया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि एकादशी के दिन मकर संक्रांति की खिचड़ी कैसे खाई और दान की जाए।
पंचांग के अनुसार क्या है समाधान?
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, माघ कृष्ण षटतिला एकादशी तिथि 13 जनवरी को दोपहर 3:17 बजे प्रारंभ होगी। 14 जनवरी को शाम 5:52 बजे समाप्त होगी।
इस तरह 14 जनवरी को मकर संक्रांति पूरे दिन रहेगी, लेकिन एकादशी तिथि शाम 5:52 बजे तक ही होगी। एकादशी तिथि समाप्त होने के बाद श्रद्धालु चावल की खिचड़ी बनाकर दान कर सकते हैं और स्वयं भी ग्रहण कर सकते हैं।
शास्त्रों का दूसरा मत
कुछ विद्वानों का यह भी मानना है कि पर्व और त्योहार नियमों की कठोरता से मुक्त होते हैं। सनातन परंपरा में पर्वकाल में किए गए शुभ कार्यों का विशेष महत्व होता है।
14 जनवरी को सूर्य देव उत्तरायण में प्रवेश करते हैं, जिसे देवताओं का काल कहा गया है। इस दौरान किया गया दान, पूजा और भोग कई गुना फलदायी माना जाता है।
मकर संक्रांति की पूजा विधि
सूर्योदय से पहले पवित्र नदी में स्नान करें
यदि नदी स्नान संभव न हो, तो घर पर जल में गंगाजल और काले तिल मिलाकर स्नान करें
तांबे के लोटे में जल, लाल फूल, अक्षत और तिल डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें
अर्घ्य देते समय मंत्र जपें
‘ॐ सूर्याय नमः’ या ‘ॐ घृणि सूर्याय नमः’
अंत में अपनी सामर्थ्य अनुसार तिल, गुड़, चावल, वस्त्र या धन का दान करें