
धर्म डेस्क। हिंदू पंचांग के अनुसार, साल 2026 में मकर संक्रांति का पावन पर्व 14 जनवरी को मनाया जाएगा। यह त्योहार सूर्य के धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करने का प्रतीक है, जिसे 'उत्तरायण' की शुरुआत माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन किए गए दान और पुण्य का फल 'अक्षय' होता है, यानी इसका लाभ कभी समाप्त नहीं होता।
शास्त्रों में इस विशेष दिन के लिए कुछ नियम बताए गए हैं। यदि आप भी इस दिन का पूर्ण आध्यात्मिक लाभ उठाना चाहते हैं, तो इन 'क्या करें और क्या न करें' (Do's and Don'ts) की बातों का विशेष ध्यान रखें।

पवित्र स्नान - सूर्योदय से पूर्व उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करें। यदि घर पर स्नान कर रहे हों, तो पानी में थोड़ा गंगाजल अवश्य मिलाएं।
सूर्य अर्घ्य - स्नान के पश्चात तांबे के लोटे में जल, लाल फूल, अक्षत और काले तिल डालकर 'ॐ सूर्याय नमः' मंत्र के साथ सूर्य देव को अर्घ्य दें।
तिल का महत्व - इस दिन तिल के पानी से स्नान और तिल का सेवन शनि दोषों को शांत करने में सहायक माना जाता है।
खिचड़ी दान - उड़द दाल और चावल की खिचड़ी का दान करना और स्वयं भी इसे प्रसाद स्वरूप ग्रहण करना इस पर्व की मुख्य परंपरा है।
गौ सेवा - गाय को हरा चारा, गुड़ और तिल खिलाने से सौभाग्य में वृद्धि होती है।
धार्मिक दृष्टि से संक्रांति के दिन कुछ कार्यों को अशुभ माना गया है-
देर तक न सोएं - यह पर्व सूर्य देव की उपासना का है, इसलिए सूर्योदय के बाद तक सोना पुण्य फलों को कम करता है।
तामसिक भोजन का त्याग - इस दिन मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज का सेवन पूरी तरह वर्जित है। सात्विक भोजन ही अपनाएं।
बिना स्नान भोजन - मान्यता है कि बिना स्नान और दान किए भोजन या जल ग्रहण नहीं करना चाहिए।
प्रकृति को नुकसान - शास्त्रों के अनुसार, इस दिन हरे पेड़ों की कटाई करना वर्जित माना गया है।
क्रोध और वाद-विवाद - यह मिठास का पर्व है, इसलिए इस दिन अपशब्द बोलने या किसी का अपमान करने से बचना चाहिए।
पूजा के समय इन मंत्रों का जाप करने से विशेष ऊर्जा प्राप्त होती है-
ॐ घृणिः सूर्याय नमः।।
ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः क्लीं ॐ।।
ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते, अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकरः।।
मकर संक्रांति केवल एक त्योहार नहीं बल्कि आध्यात्मिक चेतना को जगाने का दिन है। संयम और श्रद्धा के साथ किए गए ये कार्य आपके पूरे वर्ष को मंगलमय बना सकते हैं।