Malmas Ends: 14 अप्रैल को मलमास समाप्त, शुरू होगा शादियों का सीजन… नोट कीजिए शादी, मुंडन और ग्रह प्रवेश के शुभ मुहूर्त
सनातन धर्म में ग्रहों के राशि परिवर्तन (Rashi Parivartan) का व्यापक प्रभाव बताया गया है। मलमास (Malmas) का सीधा संबंध सूर्य के राशि परिवर्तन से है। सूर्य एक वर्ष में बारह राशि में परिभ्रमण कर लेते हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, सूर्य का धनु तथा मीन में गोचर अच्छा नहीं माना जाता है, इसलिए इस अवधि को मलमास कहते हैं।
Publish Date: Sat, 12 Apr 2025 07:41:35 AM (IST)
Updated Date: Sat, 12 Apr 2025 07:41:35 AM (IST)
शुभ, मांगलिक कार्यों के लिए गुरु व शुक्र का तारा उदित होना अनिवार्य है। (फाइल फोटो)HighLights
- सूर्य मीन राशि को छोड़ मेष राशि में प्रवेश करेंगे
- इसी कारण मलमास की समापन माना जाएगा
- शुभ मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाएगी
धर्म डेस्क, इंदौर। पंचांग की गणना के अनुसार, 14 अप्रैल, सोमवार को मलमास का समापन होगा। इसके साथ ही विवाह आदि मांगलिक कार्यों की शुरुआत होगी।
करीब पौने दो माह लगातार शुभ मुहूर्त रहेंगे। इसके बाद 12 जून से 8 जुलाई तक गुरु का तारा अस्त होने से मांगलिक कार्य नहीं होंगे। अगले मुहूर्त चातुर्मास के बाद 16 नवंबर से शुरू होंगे।
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सूर्य का मेष राशि में प्रवेश
- उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं.अमर डब्बावाला ने बताया कि नवग्रहों के राजा सूर्य एक राशि में एक माह गोचर करते हैं। अर्थात सूर्य एक वर्ष में बारह राशि में परिभ्रमण कर लेते हैं।
- सूर्य का धनु तथा मीन में गोचर अच्छा नहीं माना जाता है, इसलिए इन्हें मलमास कहते हैं। वर्तमान में सूर्य मीन राशि में गोचर कर रहे हैं, इसे मीन मास या मलमास कहा जाता है।
- 14 अप्रैल को सूर्य मीन राशि को छोड़कर मेष राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य के मेष राशि में आते ही मलमास का समापन होगा तथा शुभ मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाएगी।
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गुरु व शुक्र का तारा उदित होना अनिवार्य
मुहूर्त चिंतामणि के अनुसार- शुभ, मांगलिक कार्यों के लिए गुरु व शुक्र का तारा उदित होना अनिवार्य है। इन दोनों में से कोई भी तारा अस्त रहता है, तो मांगलिक कार्य नहीं होते हैं।
पं. डब्बावाला ने बताया 12 जून से 8 जुलाई तक गुरु का तारा अस्त रहेगा। इसलिए इस दौरान मांगलिक कार्य नहीं होंगे।
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