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19 अक्‍टूबर सुबह 10 बजकर 51 मिनट पर शुरू होगी नवमी तिथि, मां सिद्धिदात्री की पूजा का विशेष महत्‍व

पंचांग के अनुसार, आश्विन शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 51 मिनिट बजे शुरू होकर 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 50 बजे तक रहेगी। महानवम...और पढ़ें

By Jogendra SenEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Thu, 15 Oct 2026 07:02:39 PM (IST)Updated Date: Thu, 15 Oct 2026 07:12:52 PM (IST)
19 अक्‍टूबर सुबह 10 बजकर 51 मिनट पर शुरू होगी नवमी तिथि, मां सिद्धिदात्री की पूजा का विशेष महत्‍व
महानवमी पर करें मां की आराधना।

HighLights

  1. महानवमी पर मां सिद्धिदात्री की पूजा, 350 से अधिक देवी प्रतिमाओं का होगा विसर्जन।
  2. 19 अक्टूबर से शुरू होगी नवमी तिथि, 20 अक्टूबर को दोपहर तक कन्या पूजन, हवन।
  3. मां सिद्धिदात्री भक्तों को सिद्धियां और मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद प्रदान करती हैं।

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। शारदीय नवरात्र में 19 अक्टूबर को महानवमी पर मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना की जाएगी। इस दिन मंदिरों और घरों में हवन, पूजन और कन्या भोज के आयोजन होंगे। वहीं, शहर के करीब 350 देवी पंडालों में विराजित प्रतिमाओं का विसर्जन भी किया जाएगा।

इसके लिए सागरताल के पास स्थित अस्थायी विसर्जन कुंड, रमौआ डैम, नूराबाद नदी सहित अन्य निर्धारित स्थानों पर व्यवस्थाएं की जाएगी। पंजाबी व सिंधी समाज सहित कुछ परिवार अष्टमी पूजन कर आदिशक्ति की विदाई करते हैं।

पंचांग के अनुसार, आश्विन शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 51 मिनिट बजे शुरू होकर 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 50 बजे तक रहेगी। महानवमी पर मां सिद्धिदात्री की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।


धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां सिद्धिदात्री भक्तों को सिद्धियां और मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। नवरात्र के अंतिम चरण में श्रद्धालु घरों और देवी पंडालों में पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना करेंगे।

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कन्या पूजन और हवन के साथ होगा व्रत का पारण

महानवमी पर कन्या पूजन, हवन और व्रत पारण की तैयारियां भी रहेंगी। श्रद्धालु नौ कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर पूजन करेंगे और उन्हें भोजन कराकर उपहार देंगे। पंचांग में नवमी तिथि की गणना के अनुसार, 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 50 बजे तिथि समाप्त होने से पहले कन्या पूजन और हवन किया जा सकेगा। हालांकि, पूजा के मुहूर्त के लिए स्थानीय पंचांग और परंपरा के अनुसार समय तय किया जाएगा।

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विसर्जन के लिए बनेंगे अस्थायी कुंड

शहर में विभिन्न स्थानों पर स्थापित देवी प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए सागरताल के पास बने अस्थायी कुंड, रमौआ डैम और नूराबाद नदी सहित अन्य स्थानों पर इंतजाम किए जाएंगे। विसर्जन के दौरान श्रद्धालु ढोल-नगाड़ों और जयकारों के साथ प्रतिमाओं को विदाई देंगे। नवरात्र के दौरान सजे देवी पंडालों में पूजा-अर्चना के बाद विसर्जन के साथ उत्सव का समापन होगा। पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए प्रतिमाओं का विसर्जन निर्धारित स्थानों पर करने की अपील भी की जाएगी।