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आज नवरात्र के नौवें दिन करें देवी सिद्धिदात्री की आराधना, 11:43 बजे से दोपहर 12:29 बजे तक पूजा का समय

शारदीय नवरात्र 2026: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि की नौवीं माला देवी सिद्धिदात्री को समर्पित है; जानें आज का शुभ रंग, प्रसाद, पूजा का महत्व औ...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Mon, 19 Oct 2026 09:42:46 AM (IST)Updated Date: Mon, 19 Oct 2026 09:54:33 AM (IST)
आज नवरात्र के नौवें दिन करें देवी सिद्धिदात्री की आराधना, 11:43 बजे से दोपहर 12:29 बजे तक पूजा का समय
देवी सिद्धिदात्री

HighLights

  1. हिंदू धर्म में नवरात्रि उत्सव का विशेष महत्व है।
  2. इस दौरान देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है।
  3. यह आदिशक्ति दुर्गा मां की पूजा के लिए समर्पित है।

धर्म डेस्‍क। पूरे देश में शारदीय नवरात्रि उत्सव के कारण हर जगह भक्ति और उत्साह का माहौल है। वैदिक कैलेंडर के अनुसार, हालांकि नवरात्रि का नौवां दिन 19 अक्टूबर को है, लेकिन आज अष्टमी और नवमी एक ही दिन पड़ रही है। हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि उत्सव का विशेष महत्व है।

इस दौरान देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है। नौ दिनों का यह उत्सव आदिशक्ति दुर्गा मां की पूजा के लिए समर्पित है। नवरात्रि के आखिरी दिन देवी दुर्गा के नौवें रूप यानी देवी सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है।


धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी सिद्धिदात्री अपने भक्तों को सिद्धि, ज्ञान और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करती हैं। इसलिए, नवरात्रि की नौवीं माला पर देवी की पूजा का विशेष महत्व है। आइए जानते हैं आज का शुभ रंग, प्रसाद, पूजा का शुभ समय, धार्मिक महत्व।

देवी सिद्धिदात्री कौन हैं? (शारदीय नवरात्रि 2026)

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सिद्धिदात्री देवी दुर्गा के नौ रूपों में से नौवां और अंतिम रूप हैं। सिद्धिदात्री नाम का अर्थ है 'सिद्धि प्रदान करने वाली देवी'। मान्यताओं के अनुसार, देवी की पूजा करने से भक्त को ज्ञान, बुद्धि, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक शक्ति मिलती है। देवी सिद्धिदात्री का वाहन शेर है, और उनके चार हाथों में कमल, शंख, चक्र और गदा बताए गए हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव ने देवी की कृपा से कई सिद्धियां हासिल की थीं। इसलिए, देवी सिद्धिदात्री की पूजा को शक्ति और शिव तत्व की एकता का प्रतीक माना जाता है।

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देवी सिद्धिदात्री की पूजा का शुभ समय

  • पंचांग के अनुसार, अष्टमी तिथि 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे खत्म हो रही है और नवमी तिथि शुरू हो रही है।
  • नवमी तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर करीब 12:50 बजे तक रहेगी। इसलिए, आज नवमी की पूजा के लिए तिथि पर विचार करना ज़रूरी है।
  • पंचांग में दी गई जानकारी के अनुसार, आज का शुभ समय सुबह 11:43 बजे से दोपहर 12:29 बजे तक है।
  • इस दौरान देवी की पूजा की जा सकती है। हालांकि, पूजा का सही समय स्थानीय पंचांग और घर की परंपराओं के अनुसार तय किया जाना चाहिए।

आज शुभ रंग क्या है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के नौवें दिन देवी सिद्धिदात्री की पूजा के लिए बैंगनी रंग को खास महत्व दिया जाता है। बैंगनी रंग को आध्यात्मिकता, शांति और पॉजिटिविटी का प्रतीक माना जाता है। इसलिए, कुछ जगहों पर इस दिन बैंगनी कपड़े पहनकर देवी की पूजा करने की परंपरा है। हालांकि, नवरात्रि के हर दिन का शुभ रंग अलग-अलग क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार बदल सकता है।

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देवी सिद्धिदात्री को कौन सा नैवेद्य चढ़ाना चाहिए?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी सिद्धिदात्री को नैवेद्य चढ़ाते समय सात्विक खाने को प्राथमिकता दी जाती है। शिरस, पूरी, काले चने, तिल, फल और मिठाई से बने खाने का रिवाज है। देवी को नैवेद्य चढ़ाते समय साफ-सफाई और आस्था को खास महत्व दिया जाता है। कुछ परिवारों में कन्या पूजन के बाद छोटी लड़कियों को मीठा नैवेद्य खिलाया जाता है। उन्हें देवी का रूप माना जाता है और कुमकुम, अक्षत, दक्षिणा और तोहफों से उनका सम्मान किया जाता है।

देवी सिद्धिदात्री की पूजा कैसे करें?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के नौवें दिन सुबह जल्दी उठकर नहाना चाहिए और घर के देवघर की सफाई करनी चाहिए। उसके बाद देवी दुर्गा की तस्वीर के सामने दीया जलाना चाहिए और फूल, कुमकुम, अक्षत और नैवेद्य चढ़ाना चाहिए। देवी सिद्धिदात्री का ध्यान करना चाहिए और उनके मंत्र का जाप करना चाहिए। उसके बाद आरती करनी चाहिए और परिवार की सुख, शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना करनी चाहिए।

देवी सिद्धिदात्री का मंत्र

'ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः।'

इस मंत्र का जाप भक्ति भाव से किया जाता है। पूजा के बाद, अपनी परंपरा के अनुसार कन्यापूजन करना चाहिए और नवरात्रि का व्रत खत्म करना चाहिए।

कन्यापूजन का धार्मिक महत्व

कई परिवारों में नवरात्रि के नौवें दिन कन्यापूजन करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन छोटी लड़कियों को देवी के रूप के दर्शन कराकर उनका सम्मान किया जाता है। उन्हें खाना खिलाना, दक्षिणा देना और आशीर्वाद लेना इस रस्म का अहम हिस्सा है। यह परंपरा नारी शक्ति के सम्मान और समाज में लड़कियों के सम्मान का संदेश देती है।

नवरात्रि उत्सव का समापन

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नौवें दिन देवी सिद्धिदात्री की पूजा करके नवरात्रि उत्सव का समापन किया जाता है। कुछ जगहों पर हवन, दुर्गा सप्तशती का पाठ और खास आरती की जाती है। फिर विजयादशमी या दशहरा मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के नौ दिनों तक भक्ति भाव से देवी की पूजा करने से मन को शांति और पॉजिटिव प्रेरणा मिलती है। पूजा की तारीखें, शुभ समय और रीति-रिवाज लोकल कैलेंडर और परिवार की परंपराओं के हिसाब से अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए, पूजा करने से पहले अपने शहर का कैलेंडर देख लेना अच्छा रहेगा।