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Navratri 2026 Second Day: नवरात्र के दूसरे दिन करें देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा, जानें आज का शुभ रंग, प्रसाद, पूजा का समय

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के दूसरे दिन सफेद रंग शुभ माना जाता है। सफेद रंग शांति, पवित्रता और सादगी का प्रतीक है। इसलिए, कई भक्त आज सफेद क...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Mon, 12 Oct 2026 09:37:59 AM (IST)Updated Date: Mon, 12 Oct 2026 09:45:07 AM (IST)
Navratri 2026 Second Day: नवरात्र के दूसरे दिन करें देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा, जानें आज का शुभ रंग, प्रसाद, पूजा का समय
देवी ब्रह्मचारिणी

HighLights

  1. 12 अक्टूबर, 2026 को शारदीय नवरात्रि उत्सव में नवरात्रि की दूसरी माला है
  2. और इस दिन देवी दुर्गा के दूसरे रूप देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है।
  3. आइए जानते हैं आज का शुभ रंग, प्रसाद, पूजा का शुभ समय, धार्मिक महत्व।

Navratri 2026 Second Day: शारदीय नवरात्रि का त्योहार 11 अक्टूबर से शुरू हो गया है। हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि त्योहार का खास महत्व है। इस दौरान देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है। अश्विन महीने में मनाया जाने वाला यह नौ दिन का त्योहार आदिशक्ति दुर्गा मां की पूजा के लिए समर्पित है।

भक्ति, शक्ति की पूजा, बुरी प्रवृत्तियों पर अच्छाई की जीत और पॉजिटिव एनर्जी का संदेश देने वाला यह त्योहार पूरे देश में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आज सोमवार, 12 अक्टूबर, 2026 को शारदीय नवरात्रि उत्सव में नवरात्रि की दूसरी माला है और इस दिन देवी दुर्गा के दूसरे रूप देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है।

हिंदू धर्म में नवरात्रि की दूसरी माला का खास महत्व है। आइए जानते हैं आज का शुभ रंग, प्रसाद, पूजा का शुभ समय, धार्मिक महत्व।

देवी के नौ रूपों की पूजा (शारदीय नवरात्रि 2026)

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शारदीय नवरात्रि उत्सव के दौरान देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है, यानी शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री। हर रूप को खास गुणों, शक्तियों और आध्यात्मिक मूल्यों का प्रतीक माना जाता है। इस नौ दिन के उत्सव के दौरान, भक्त उपवास, पूजा, मंत्र जाप और आरती करके देवी की पूजा करते हैं।


देवी ब्रह्मचारिणी कौन हैं? (देवी ब्रह्मचारिणी)

पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनके इस तपस्वी रूप को देवी ब्रह्मचारिणी कहा जाता है। देवी के एक हाथ में माला और दूसरे हाथ में कमंडल है। देवी का यह रूप आत्म-नियंत्रण, ध्यान, साहस और लक्ष्य के प्रति समर्पण का संदेश देता है। भक्तों का मानना ​​है कि नवरात्रि के दूसरे दिन देवी की पूजा करने से मन को शांति और पॉजिटिव एनर्जी मिलती है।

आज का शुभ रंग क्या है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के दूसरे दिन सफेद रंग शुभ माना जाता है। सफेद रंग शांति, पवित्रता और सादगी का प्रतीक है। इसलिए, कई भक्त आज सफेद कपड़े पहनकर देवी की पूजा करते हैं। पूजा में सफेद फूल चढ़ाने को भी महत्व दिया जाता है।

देवी को क्या चढ़ाना चाहिए?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी ब्रह्मचारिणी को चीनी, मिश्री, दूध, पंचामृत और ताजे फलों का प्रसाद चढ़ाने की परंपरा है। भोग लगाते समय देवी को याद किया जाता है और परिवार की सुख-समृद्धि और सभी की भलाई के लिए प्रार्थना की जाती है।

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देवी की पूजा का शुभ समय

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के दूसरे दिन देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा करने की परंपरा है। आज सुबह स्नान करके और साफ कपड़े पहनकर देवी की पूजा की जा सकती है। पंचांग के अनुसार, पुणे में शुभ समय सुबह 11:57 बजे से दोपहर 12:44 बजे तक बताया गया है। अमृत काल दोपहर 2:35 बजे से शाम 4:16 बजे तक है। हालांकि, धार्मिक अनुष्ठानों के लिए, स्थानीय पंचांग के अनुसार शुभ समय का समय देखना ज़रूरी है। शुभ समय का समय हर शहर में अलग-अलग हो सकता है। इसलिए, अपने इलाके के पंचांग के अनुसार पूजा करना सही रहता है।

देवी ब्रह्मचारिणी का मंत्र

देवी की पूजा के दौरान नीचे दिए गए मंत्र का जाप किया जाता है।

ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के दूसरे दिन देवी ब्रह्मचारिणी के मंत्र का जाप करने से मन को शांति, धैर्य, आत्मविश्वास और दृढ़ निश्चय की प्रेरणा मिलती है।

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देवी की पूजा के लिए ऐसे करें

सुबह नहाकर पूजा की जगह को साफ करें। देवी की तस्वीर के सामने दीपक जलाएं और अक्षत, चंदन और फूल चढ़ाएं। उसके बाद चीनी या फलों का नैवेद्य चढ़ाएं और ‘ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः’ मंत्र का जाप करें। आखिर में देवी की आरती करें और मन से प्रार्थना करें।

धैर्य, दृढ़ता और लक्ष्य प्राप्ति...

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि सिर्फ एक धार्मिक त्योहार नहीं है, बल्कि आस्था, भक्ति और संस्कृति को बचाए रखने का एक महत्वपूर्ण त्योहार है। भक्त देवी शैलपुत्री के चरणों में प्रार्थना करके भक्ति भाव से नवरात्रि उत्सव की शुरुआत करते हैं। नवरात्रि की दूसरी माला सिर्फ देवी की पूजा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसे धैर्य, दृढ़ता और लक्ष्य को पाने के लिए लगातार कोशिश करने की प्रेरणा देने वाला दिन माना जाता है। देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा से भक्तों को मुश्किल हालात में भी हिम्मत बनाए रखने और विश्वास के साथ आगे बढ़ने का संदेश मिलता है।